कुमार गौरव
बांदा। उद्यान विभाग ने भ्रष्टाचार का गजब ढा दिया? घोटाले की बदबू से पूरा उद्यान प्रदूषित हो गया है। सागौन,शीशम और उस जैसी जैसी अन्य मालदार लकड़ी की बिक्री में भ्रष्टाचार की ऐसी बेल पनपा दी गई की कथित तौर पर 50 लाख के सूखे पेड़ों को बेचने के लिये नियमों की अनदेखी कर नीलामी ही नहीं कराई गई। 15 हजार में पेड़ बेच दिया ।

विभागीय सूत्रों की मानें तो निदेशालय से भी सच्चाई छिपाई गई। लकड़ी की कीमत 10 से 15 हजार बताकर बेचने की स्वीकृति प्राप्त कर ली गई। उद्यान विभाग की नवाब टैंक स्थित राजकीय नर्सरी में शीशम, सागौन, आंवला जैसे 35 बेशकीमती पेड़ सूख गए थे। जिनकी बाजारू कीमत लगभग 50 लाख रुपये थी। विभाग ने निदेशालय को सही तथ्यों से छुपाया। पेड़ों की कीमत 10 से 15 हजार बताई। अनुमति के लिए पत्र लिखा। निदेशालय ने पेड़ों की कीमत कम होने पर स्वीकृति दे दी। क्योंकि 10 से 15 हजार की कीमत के पेड़ों को बिना नीलामी बेचा जा सकता है, लेकिन इससे ज्यादा कीमत के पेड़ों की बिक्री के लिए टेंडर और नीलामी अनिवार्य है।

आरोप हैं की विभाग ने दो लकड़ी व्यापारियों से सांठ गांठ कर 50 लाख की लकड़ी 15 हजार में बेच दी। नर्सरी के कर्मचारियों का कहना है कि सूखे पेड़ों की करीब तीन ट्रक लकड़ी थी। जिसकी कीमत 50 लाख से भी अधिक थी। एक पेड़ शीशम व सागौन का 10 लाख में जाता है। जिला उद्यान अधिकारी केशवराम का दावा है कि लकड़ी की बिक्री नियमों के तहत की गई है,जबकि उप निदेशक उद्यान विनय कुमार यादव का कहना है जांच कराई जाएगी।













