कुमार गौरव
बांदा। धान खरीद में गजब का भ्रष्टाचार है। बबेरू तहसील स्थित आहार गांव में धान खरीद में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। व्यापारियों पर इलेक्ट्रॉनिक तराजू में गड़बड़ी कर किसानों से कम धान खरीदने और बिना लाइसेंस के खरीद करने का आरोप है। इस मामले में दुकानदारों पर 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। किसानों को उनका बकाया भुगतान के कड़े निर्देश दिये गये है।

किसानों ने आरोप लगाया कि दुकानदार प्रति बोरी 8 से 10 किलोग्राम धान कम तौल रहे हैं । यह धोखाधड़ी तब उजागर हुई जब कुछ किसानों ने मंडी लाने से पहले अपने घर पर धान का वजन किया। किसानों का कहना है कि इस प्रकार दर्जनों किसानों को लाखों रुपये का चूना लगाया जा चुका है। धोखाधड़ी का पता चलने पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार मनोहर सिंह और मंडी सचिव अखंड प्रताप सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने व्यापारियों की दुकानों में रखे धान को जब्त कर दोबारा तौलवाया, जिससे किसानों के आरोप सही साबित हुए।

जांच में सामने आया कि व्यापारी ऊंची कीमत बताकर कम धान तौल रहे थे, जिससे छोटे और बड़े दोनों तरह के किसानों को खुलेआम धोखा दिया जा रहा था। जांच के दौरान अधिकारियों को यह भी पता चला कि दुकानदारों के पास धान खरीद का लाइसेंस नहीं था। इसके बाद,मंडी सचिव ने यह सुनिश्चित किया कि कम तौले गए धान के लिए दर्जनों किसानों को उनका बकाया पैसा वापस मिले, जिसके बाद किसान शांत हुए। सही तौल के बाद किसानों को उनका पूरा भुगतान कर दिया गया। हालांकि,किसानों ने मंडी सचिव और स्थानीय विभागीय प्रशासन पर व्यापारियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है।













