कुमार गौरव
बांदा। मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ की सरकार में बांदा जिले में बालू खनन नीति को यहां के जिम्मेदार निर्भीकता सें ठेंगा दिखा रहें हैं। जो कथित तौर पर प्रशासनिक निकम्मेपन की परिचायक सी बन गई है?बालू के अवैध खनन एवं परिवहन को रोकने में “प्रशानिक कड़ी कार्यवाई नौटंकी” साबित होने लगी है! प्रशासन की कथित सरपरस्ती में बालू “माफियाओं की चांदी” हैं!उनके अट्टाहस भरे ठुमके लग रहें हैं “सइयां भये कोतवाल डर काहे का”?

घोर भरे आश्चर्य का नमूना बता रहें हैं की चरका खंड आठ,तेरा ब,भदावल,महुटा,आदि डेढ़ दर्जन संचालित बालू खदानों में 99 प्रतिशत बालू खदानों में अवैध खनन का का तांडव मचा हुआ है? लेकिन प्रशासन खदान संचालकों के साथ जोड़ पत्ता खेल रहा है! खनन में अवैध परिवहन रोकने के लिये की गई “खनिज विभाग की कार्यवाई भी ढेर” है!इस कार्य में लगे वाहनों ने कितने चक्कर लगाए, कहां-कहां गईं को पारदर्शी बनाने के लिए खनिज विभाग ने जिले में संचालित खदानों में परिवहन करने वाले ट्रकों के लिए व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) लगाने की तैयारी की मुनादी की थी। विभाग को शासन से एक हजार वीटीएस भी मिले। खनिज विभाग की मानें तो इन वीटीएस को खदानों में भेजा गया है।

जिला खनिज अधिकारी राज रंजन ने दावा किया था कि खदानों में मौरंग परिवहन में लगे ट्रको में अब वीटीएस लगाया जा रहा है। इसके लगने से चेकिंग के दौरान अधिकारियों को यह पता चल जाएगा कि ट्रक ने किस खदान से मौरंग को लोड किया, वह कहां-कहां गई। उसने कितने चक्कर लगाए। इसका पूरा डाटा निकलकर आ जाएगा। इससे ट्रक अवैध परिवहन नहीं कर पाएंगे।लेकिन यह योजना ढेर हो गई। अभी तक ट्रक मालिकों नें यह “सिस्टम गाड़ियों में नहीं लगवाया”? इसके बावजूद इस नियमावली के उलंघन के बावजूद “बिना व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगे वाहन को रायल्टी” दी जा रही है। यह “प्रशासनिक निकम्मेपन की हैरतअंगेज” स्थिति सी मानी जा रही है?













