कुमार गौरव
बांदा। जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल पर भ्रष्टाचार के स्पष्ट आरोप सिद्ध होंने के बाद भी शासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से सियासी आंधी उठ खड़ी हुई है। भाजपा से जुड़े ही डीडीसी (जिला पंचायत सदस्य) अब अपने ही दल के अध्यक्ष के खिलाफ अनशन पर हैं।“सुनील हटाओ, भ्रष्टाचार मिटाओ” के नारे बुलंदी से गूंज रहे हैं। अध्यक्ष सुनील पटेल पर करोड़ों रुपए के गबन के सबूत मिलने के बाद भी उनके वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारों पर रोक नहीं लगना विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ भाजपा के अपने ही सदस्यों के बीच भी गुस्सा भड़का रहा है। महोबा के जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने आयोजित जांच में सुनील पटेल को भ्रष्टाचार का दोषी पाया था। इस रिपोर्ट के आधार पर मंडलायुक्त अजीत कुमार ने शासन को पत्रावली भेजी, 25 जुलाई को धारा 29 के तहत नोटिस जारी किया गया। बावजूद सुनील पटेल लगातार पद का उपयोग कर रहे हैं। इस पर नाराज डीडीसी सदस्यों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है। सदस्य भरत सिंह, धीरज राजपूत, नीरज प्रजापति, अरुण पटेल समेत अन्य सदस्यों ने शुक्रवार से अनशन शुरू किया और “सुनील हटाओ अभियान” को जोर पकड़ा दिया।

अनशनकारी सदस्यों का आरोप है कि उच्चाधिकारियों द्वारा “अपूर्ण या गलत जानकारी” शासन तक पहुंचाने की नीति अपनाई जा रही है,जिससे प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी वाहवाही धूमिल हो रही है। डीडीसी सदस्य धीरज राजपूत ने कहा, “हम न तो विरोध कर रहे हैं और न ही राजनीति कर रहे हैं — हम न्याय की मांग कर रहे हैं। भ्रष्टाचार से संक्रमित अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि अनशन स्थल पर अध्यक्ष के समर्थक सदस्य हमें ‘टारगेट’ कर रहे हैं। ठेकेदारों से अवैध तरीके से कमीशन वसूली भी जारी है! जिला पंचायत को भ्रष्टाचार की सड़ांध से मुक्त मिलनी चाहिये। अनशनरत सदस्यों ने स्पष्ट किया है कि जब तक जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारों को सीज नहीं किया जाता तब तक अनशन जारी रहेगा।

डीडीसी सदस्य भरत सिंह ने कहा, “अब आर-पार की लड़ाई है। हमारा लक्ष्य केवल सुनील पटेल को हटाना नहीं, बल्कि पंचायती राज की ईमानदारी को बचाना है। जनता हमारे साथ है।” आंदोलन को गहराते हुए, डीडीसी सदस्यों ने घोषणा की है कि वे जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे। उनकी मांग रहेगी कि भ्रष्टाचार के दोषी अध्यक्ष के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए।













