कुमार गौरव
बांदा। जिला अस्पताल में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मरीजों का कहना है कि उन्हें बाहर से दवाएं खरीदने और निजी जांचें कराने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आरोप है कि अस्पताल के कुछ डॉक्टर सरकारी नियमों को दरकिनार कर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं और एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड जैसी जांचें निजी केंद्रों से कराने की सलाह दे रहे हैं।

मरीजों को अक्सर “स्टॉक नहीं है” या “मशीन खराब है” कहकर बाहर भेज दिया जाता है, जिससे उन्हें निजी मेडिकल स्टोर और जांच केंद्रों पर मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। इसके अलावा, कुछ डॉक्टर अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद निजी क्लीनिकों में बैठकर मरीजों से फीस वसूल रहे हैं, जो सरकारी सेवा और निजी प्रैक्टिस के बीच हितों के टकराव का सवाल खड़ा करता है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि जिला अस्पताल परिसर में निजी दवा कंपनियों के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) खुलेआम घूमते नजर आते हैं, जो स्वास्थ्य विभाग के नियमों का उल्लंघन है। अब स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है।











