कुमार गौरव
बांदा। ओवरलोडिंग और अवैध खनन पर कार्रवाई से बचने के लिए खनन माफिया ने ‘खुफिया तंत्र’ खड़ा कर लिया है। सरकारी गाड़ी देखते ही जगह-जगह फैले माफिया व्हॉट्सऐप ग्रुप में मैसेज से अलर्ट कर देते हैं। इससे ओवरलोडिंग और खनन में लगी गाड़ियां अपना रूट बदल देतीं हैं। यह स्थिति डीएम एवं एसपी के लिये किसी चैलेंज से कम नहीं है?

डीएम और एसपी को यदि माफियाओं के चक्रव्यूह को तोड़ना है तो विभागीय टीमों को नेटवर्क की गहराई तक जांच और कार्रवाई तेज करने का दबाव बनाना पड़ेगा। पुलिस, खनन और परिवहन विभाग की संयुक्त टीमों को रात दिन नजर रखनी होंगी। तभी लोकेशन बाजों का संगठित गिरोह का खुलासा हो सकेगा।

सूत्रों के अनुसार लोकेटर एसडीएम, एआरटीओ, खान निरीक्षक और राजस्व टीम की गाड़ियों को दूर से फॉलो कर उनकी हर लोकेशन व्हॉट्सऐप ग्रुप में भेजते हैं, जैसे ही कोई सरकारी वाहन किसी क्षेत्र में पहुंचताहै, ग्रुप में संदेश भेज कर एलर्ट कर दिया जाता है। इन सूचनाओं के आधार पर ओवरलोड ट्रक ग्रामीण मार्गों में या गांवों के अंदर खड़े कर दिए जाते हैं। जिससे टीम को चेकिंग में कुछ नहीं मिलता।

पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल को चाहिये की वह साइबर जांच मोबाइल डेटा एनालिसिस और व्हॉट्सऐप ग्रुप की तकनीकी जांच कराये। क्योंकि तकरीबन 24 घंटे एक्टिव रहने वाले इस नेटवर्क में लोकेटर सरकारी गाड़ियों के पीछे चलकर हर मोड़ की सूचना देते हैं।













