कुमार गौरव
बांदा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी समारोह के तहत हिंदू सम्मेलन आयोजित हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि बागेश्वर धाम पीठाधीश पं.धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने समाज को एकजुट रहने और संस्कारों को सहेजने का संदेश दिया।उन्होंने कहा कि हम अपनी संपत्ति और व्यापार को तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाकर रखते हैं, लेकिन उतना ही आवश्यक है कि हम संस्कार भी अपनी पीढ़ियों को सौंपें, ताकि समाज और संस्कृति सुरक्षित रह सके।

बागेश्वर महाराज ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भूमिका पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि देश में आरएसएस न होता, तो आज जितने हिंदू बचे हैं, शायद उतने भी न होते। उन्होंने संगठन को समाज को जोड़ने वाली शक्ति बताया। महाराज श्री ने कहा कि तिल अकेला रहता है तो उसका कोई अस्तित्व नहीं होता, लेकिन जब वह गुड़ के साथ मिल जाता है तो लड्डू बन जाता है. यही एकता की शक्ति है, जो समाज को मजबूत बनाती है।

उन्होंने कहा कि यदि समाज में एकता रहेगी तो कोई भी ताकत उसे परास्त नहीं कर पाएगी. पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि संस्कृति और संस्कारों की रक्षा के लिए जातियां रहें, लेकिन जातिवाद समाप्त होना चाहिए। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि जहां ताकत होती है,वहां एकता की शक्ति अवश्य होती है। उन्होंने समाज से आपसी मतभेद भुलाकर संगठित रहने का आह्वान किया।

सम्मेलन के दौरान उन्होंने पारिवारिक जीवन को सुदृढ़ बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण बातों पर जोर दिया पूरा परिवार एक साथ बैठकर भोजन करे, एक साथ पूजा करे और आपस में बैठकर संवाद करे। इससे परिवार के सदस्य अपने सुख-दुख साझा कर पाते हैं, आपसी संकोच दूर होता है और बहन-बेटियों व बच्चों में नैतिकता का भाव विकसित होता है। कार्यकम में संघ के प्रांत प्रचारक राम जी सहित संगठन के सभी स्थानीय पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।












