कुमार गौरव
बांदा। किसान यूनियन महाशक्ति के राष्ट्रीय महासचिव बबलू सिंह ने किसानों से कृषि भूमि को सर्वोपरि मानने और इसे हर हाल में बचाने का आह्वान किया है। एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि किसान चाहे नौकरी में हो या व्यापार में, उसका धर्म, कर्म और ईमान कृषि ही है। कृषि भूमि उसकी “मां” है और यही उसका पालनहार है। बबलू सिंह ने जोर देकर कहा कि जनसंख्या तो लगातार बढ़ेगी, उत्पादन भी बढ़ाने की आवश्यकता होगी, लेकिन कृषि भूमि लगातार घटती जा रही है। ऐसे में किसान का सबसे बड़ा दायित्व है कि वह अपनी जमीन को सुरक्षित रखे। उन्होंने कृषि भूमि को “गाड गिफ्ट” बताते हुए कहा कि इसे बेवजह बेचने से बचना चाहिए।

किसान नेता नें कहा की शहरों के पास जमीन के दाम भले ही आसमान छू रहे हों, लेकिन यदि भूमि बेचना अनिवार्य हो तो उससे प्राप्त धन को फिजूलखर्ची में न लगाकर छोटे गांवों में अधिक भूमि खरीदनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई किसान सिर्फ प्रतिष्ठा के लिए ट्रैक्टर खरीद लेते हैं, जिसका खर्च 7 से 10 लाख रुपये तक होता है। ट्रैक्टर उन्हीं किसानों को लेना चाहिए जिनके पास पर्याप्त भूमि हो और जिनके लिए इसकी वास्तविक आवश्यकता हो, अन्यथा छोटी खेती किराए के ट्रैक्टर से भी की जा सकती है।

फसल चयन को लेकर उन्होंने सुझाव दिया कि किसान अपनी जमीन में गेहूं और बाजरा उतना ही बोएं जितना परिवार की जरूरत है, जबकि अधिक से अधिक दलहन, तिलहन और सब्जियां उगाएं, जिनके बाजार भाव बेहतर मिलते हैं। किसान नेता बबलू सिंह ने यह भी कहा कि यदि जमीन का कुछ हिस्सा खाली छोड़ना पड़े, तो उसमें प्राकृतिक रूप से उगने वाली औषधीय खरपतवार को संरक्षित करें, जो आयुर्वेदिक दवाओं में काम आती हैं और अच्छी आय का स्रोत बन सकती हैं। किसान नेता ने यह भी बल दिया कि किसानों को अपनी आय का अधिक हिस्सा बच्चों की तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा में निवेश करना चाहिए, जिससे भविष्य में वे आर्थिक और सामाजिक रूप से अधिक सशक्त बन सकें।












