कुमार गौरव
बांदा। बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री ने पांच दिवसीय कथा श्रृंखला के अंतिम दिन भक्तों को हनुमान जी की भक्ति, बल और राम नाम के महत्व से रूबरू कराया। प्रवचन में उन्होंने मुख्य रूप से श्री राम कथा और हनुमंत कथा का वर्णन किया, जिसमें हनुमान जी के पराक्रम और उनके द्वारा भक्तों को प्रभु श्रीराम से मिलाने की प्रेरणादायक प्रसंगों को साझा किया।

धीरेंद्र शास्त्री ने चित्रकूट में गोस्वामी तुलसीदास जी के राम दर्शन प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान खोजने से नहीं मिलते, वे तो सर्वत्र विद्यमान हैं। उन्हें पाने के लिए व्यक्ति को स्वयं को भक्ति में पूरी तरह समर्पित करना पड़ता है। भक्तों से उन्होंने निरंतर हरि भजन करने का आह्वान करते हुए कहा कि भजन को कल पर टालना जीवन में सबसे बड़ी भूल है – “अगर सांस निकल गई, तो फिर क्या होगा?” इस संदेश के माध्यम से उन्होंने तत्काल भक्ति और नाम जप के महत्व पर जोर दिया। प्रवचन के दौरान उन्होंने हनुमान चालीसा के मंत्रों और राम नाम के जाप की महिमा बताते हुए कहा कि हनुमान जी की शक्ति, उनकी निष्ठा और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति हर भक्त के जीवन में प्रेरणा का स्रोत है।

पांचवें दिन की कथा ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से जोड़ते हुए भक्ति, हनुमान जी की महिमा और राम नाम के जाप के महत्व का गहन अनुभव कराया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और प्रवचन के दौरान वातावरण राम भक्ति और जयकारों से गूंजता रहा।












