कुमार गौरव
बांदा। गर्मी के आते ही शहर में पीने के पानी का संकट चरमोत्कर्ष की ओर बढ़ने लगा है। केन नदी के जलस्तर में भारी गिरावट के कारण जलापूर्ति के दोनों प्रमुख संयंत्रों को पर्याप्त जल नहीं मिल पा रहा, जिससे नल कनेक्शन धारकों को में त्राहि त्राहि शुरू है। जल संस्थान की लापरवाही के चलते स्थिति निरंतर बिगड़ती जा रही है। शहर की जलापूर्ति भूरागढ़ और बांबेश्वर पहाड़ पर स्थित दो जल संयंत्रों तथा सरकारी नलकूपों से की जाती है। गर्मी के मौसम में शहर को पर्याप्त पानी की आपूर्ति के लिए 26.3 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में केवल 24.3 एमएलडी ही उपलब्ध हो पा रहा है। यानी दो एमएलडी पानी की कमी बरकरार है। केन नदी का जलस्तर पिछले कुछ दिनों में 10.94 मीटर तक घट चुका है। जल संग्रहण (इंटेकवाल) तक पानी पहुंचने में कठिनाई हो रही है। इससे दोनों प्लांटों में स्थापित पंपों को पर्याप्त जल नहीं मिल पा रहा।

शहर के 31 मुहल्लों में पानी की आपूर्ति जल संस्थान करता है। जलापूर्ति महज एक घंटे है, अधिकांश मुहल्लों में एक हफ्ते में महज एक या दो बार पानी आता है! सुबह-सुबह हैंड पंपों पर लंबी कतारें लग जाती हैं। अनेक घरों में महिलाओं और बच्चों को दूर-दूर तक भरा हुआ बर्तन लेकर जाना पड़ रहा है। लेकिन जल संस्थान न तो वैकल्पिक योजना बना पाया है और न ही स्थायी समाधान के लिए कोई कार्रवाई की है। उधर, जल संकट के बीच जल संस्थान अधिकारियों की उदासीनता और निष्क्रियता के खिलाफ सामाजिक संगठनों ने धरना-प्रदर्शन की घोषणा कर दी है। नागरिकों की मांग है कि तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं, वरना गर्मियों में हाहाकार मच सकता है।










