कुमार गौरव
बांदा। जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद के अथक प्रयासों से मंजूर हुई करोड़ों की सड़क परियोजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। क्षेत्र के विकास के लिए स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रूपेश कुमार सोनकर के पास है। ऐसे में जहां एक ओर मंत्री के प्रयासों से क्षेत्र को बड़ी सौगात मिली,वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

जिले में पपरेंदा से सिकलुहा बॉर्डर तक करीब 32 किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का कार्य करीब 78 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत से कराया जा रहा है। यह मार्ग बांदा शहर, तिंदवारी, बबेरू और हमीरपुर जिले के भरुआ सुमेरपुर को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इस सड़क परियोजना को 29 मार्च 2025 को शासन से स्वीकृति मिली थी। इसके बाद जून 2025 से निर्माण कार्य शुरू कराया गया। निर्माण कार्य का जिम्मा मेसर्स अनमोल कंस्ट्रक्शन को सौंपा गया। परियोजना के लिए वित्तीय वर्ष 2024–25 में 8 करोड़ 13 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई थी। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2025–26 में 22 करोड़ 89 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि भी स्वीकृत की गई। बताया जा रहा है कि अभी तक लगभग 45 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और इस परियोजना को सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

हालांकि स्थानीय स्तर पर सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भ्रष्टाचार की चर्चाएं तेज हैं। निर्माण मानकों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि इतनी बड़ी लागत की परियोजना में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। अंततः लोगों की नजरें अब दो प्रमुख नामों पर टिक गई हैं ,एक ओर इस परियोजना को स्वीकृति दिलाने वाले मंत्री रामकेश निषाद, और दूसरी ओर इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिशासी अभियंता रूपेश कुमार सोनकर। जनता को उम्मीद है कि मंत्री के अथक प्रयासों से मिली इस बड़ी सौगात को विभाग नें जिस भ्रष्टाचार में जकड़ दिया है उसकी गंभीरता से जांच होगी।










