कुमार गौरव
बांदा। सोने की खरीदारी को “अब पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी” बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सोने के आभूषणों पर “भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस)” का “हालमार्क अब अनिवार्य “कर दिया गया है। इसके तहत 14, 18, 22, 23 और 24 कैरेट के सोने के गहनों पर छह अंकों का एचयूआईडी (हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन) कोड अंकित होगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद ग्राहकों को अब असली और प्रमाणित सोना मिलने की गारंटी मिलेगी। हालमार्क व्यवस्था लागू होने से सोने के कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी और कम कैरेट या मिलावटी सोना बेचने वाले ज्वैलर्स पर लगाम लगेगी। अब ग्राहक 22 कैरेट (916), 18 कैरेट (750) और 14 कैरेट (585) सोने की शुद्धता को लेकर पूरी तरह आश्वस्त रह सकेंगे। सोने के गहनों पर अंकित छह अंकों के एचयूआईडी कोड को बीआईएस-केयर ऐप के जरिए आसानी से जांचा जा सकेगा। ग्राहक ऐप में कोड दर्ज कर यह पता लगा सकते हैं कि खरीदा गया गहना वास्तव में कितने कैरेट का है और वह बीआईएस द्वारा प्रमाणित है या नहीं। इससे मिलावटी या कम शुद्धता वाले सोने की पहचान करना बेहद आसान हो जाएगा।

जिले में सोने-चांदी की करीब एक हजार से अधिक दुकानें संचालित हो रही हैं। इन दुकानों में प्रतिदिन औसतन करीब 10 किलोग्राम सोने के आभूषणों की खरीद-बिक्री होती है। शादी-विवाह के सीजन में यह कारोबार कई गुना तक बढ़ जाता है। ऐसे में हालमार्क अनिवार्य होने से बाजार में पारदर्शिता आएगी और ग्राहकों का भरोसा भी मजबूत होगा। हालमार्क युक्त गहनों का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि जब ग्राहक भविष्य में अपने आभूषण बेचेंगे तो उनकी शुद्धता को लेकर किसी तरह का विवाद नहीं होगा। गहनों पर अंकित एचयूआईडी कोड के आधार पर उनकी शुद्धता तय होगी और उसी के अनुसार सही कीमत मिल सकेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई ज्वैलर्स बिना हालमार्क के सोने के गहने बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में ज्वैलरी की कीमत का पांच गुना तक जुर्माना और जेल का भी प्रावधान है। इस नियम के लागू होने से कालाबाजारी और धोखाधड़ी पर काफी हद तक रोक लग सकेगी। कई बार ज्वैलर्स 22 या 24 कैरेट बताकर कम कैरेट की ज्वैलरी भी बेच देते हैं। लेकिन हालमार्क अनिवार्य होने के बाद ग्राहक खुद गहनों की शुद्धता की जांच कर सकेंगे।










