March 16, 2026 2:31 am

आयकर विभाग का बड़ा छापा: 500 करोड़ के निवेश पर मात्र 100 करोड़ टैक्स, रिश्तेदारों के नाम पर जमा हुआ अवैध पैसा

कुमार गौरव

बांदा। आयकर विभाग ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के ग्रेनाइट खनन, मेडिकल एवं रियल एस्टेट से जुड़े कई व्यापारियों के ठिकानों पर चार दिनों तक चले व्यापक छापे और जांच अभियान के बाद एक बड़े कर चोरी के मामले का खुलासा किया है। इस जांच में सामने आया है कि कुछ व्यापारियों ने अपने व्यवसाय में 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया, जबकि उन्होंने अब तक मात्र 100 करोड़ रुपये का ही आयकर चुकाया है। आयकर विभाग की टीम ने यूपी के बांदा, प्रयागराज, लखनऊ, दिल्ली तथा मध्य प्रदेश के कई शहरों में स्थित व्यापारियों के आवासों और कार्यालयों पर छापे मारे।

जांच के दौरान ग्रेनाइट कारोबारी सीरजध्वज तथा भाजपा नेता एवं मेडिकल-ग्रेनाइट व्यवसायी दिलीप सिंह के परिसरों पर शनिवार को भी गहन जांच जारी रही। इन स्थानों से ऐसे दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि 100 से अधिक रिश्तेदारों के नाम पर संचालित फर्मों के जरिए 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार चल रहा था। विशेष रूप से चौंकाने वाला पहलू यह है कि व्यापारियों ने अपने पति-पत्नी, बच्चों, साले-सालियों और अन्य निकट संबंधियों के नाम पर जायदाद और नकदी छिपाने का विस्तृत तरीका अपनाया था। जांच टीम को लखनऊ, दिल्ली, प्रयागराज और राजस्थान में ऐसे 40 से अधिक मकान मिले, जो वास्तविक स्वामियों के बजाय रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज थे और इनकी कीमत करोड़ों में आंकी गई है।

सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब जांच दल ने विभिन्न घरों के तहखानों में बोरों में भरकर रखी गई 50 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की। इस नकदी में 500 और 200 रुपये के नोटों के बंडल शामिल थे, जिनका कोई वैध स्रोत साबित नहीं किया जा सका। इसके अलावा, लॉकर से सोने और हीरे के कीमती गहने भी बरामद किए गए हैं, जिनके लिए कारोबारियों ने अब तक कोई रसीद या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है। पत्नी, बच्चों और अन्य परिजनों के नाम पर बैंकों में लगभग 100 करोड़ रुपये के फिक्स डिपॉजिट भी पाए गए हैं। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ये सभी परिसंपत्तियां और जमा राशियां वास्तविक व्यवसाय से अर्जित अघोषित आय से बनाई गई हैं। जांच के दौरान आयकर टीम के साथ गंभीर अनियमितताओं का सामना करना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक, जांच अधिकारियों को रिश्वत देने की कोशिश की गई और जब उन्होंने इसे ठुकराया तो धमकियां भी दी गईं। हालांकि, टीम ने इन धमकियों को नजरअंदाज करते हुए अपनी जांच जारी रखी।

अधिकारियों का कहना है कि कारोबारियों द्वारा जांच में सहयोग नहीं किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया लंबित हो सकती है। “हमें ऐसी संभावना है कि यह जांच महीनों तक चल सकती है। फाइलों, बैंक लेनदेन, और बेनामी प्रॉपर्टी की पड़ताल के बाद और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं,” एक वरिष्ठ आयकर अधिकारी ने बताया। आयकर विभाग के साथ-साथ बेनामी प्रॉपर्टी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। जांच टीम ने अब तक जब्त सभी दस्तावेजों और आर्थिक लेनदेनों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अगले कुछ दिनों में नोटिस जारी कर व्यापारियों से जवाब मांगा जाएगा। गंभीर धोखाधड़ी के आरोप साबित होने पर कर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामले दर्ज किए जा सकते हैं।
यह कार्रवाई केंद्र सरकार के कर चोरी पर लगाम लगाने और बेनामी परिसंपत्तियों के खिलाफ अभियान की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला उत्तर भारत के खनन और रियल एस्टेट क्षेत्र में अवैध धन के प्रवाह को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है।

Leave a Comment

और पढ़ें

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें