March 17, 2026 12:44 pm

बांदा में मरौली खंड-4 बालू खदान: ‘अवैध खनन का शैतान’ डीएम के सामने चुनौती बना

कुमार गौरव

बांदा। केन नदी की धारा में बह रहे “लाल सोने” के नाम से मशहूर बालू खनन ने बांदा के मरौली खंड-4 बालू खदान में एक अजीबोगरीब मोड़ ले लिया है। यहां का खनन अब सिर्फ एक अवैध गतिविधि से कहीं आगे बढ़कर ‘शैतानियत’ का पर्याय बन चुका है। प्रशासनिक महकमा चुपचाप खड़ा देखता रहा, जबकि खनन माफिया निर्भीक होकर सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। अब यह मामला जिलाधिकारी जे. रीभा के लिए एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बन गया है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मरौली खंड-4 बालू खदान पर नियंत्रण अब सत्ताधारी दल के संरक्षण में चल रहे एक संगठित माफियागैंग के हाथ में है। इस खदान के मालिक मल्हार प्रसाद मुरली के साथ साथ उनके सहयोगी नोनू झा, पूर्व प्रधान जगराम सिंह, सरकारी शिक्षक राजेश साहू सक्रिय रोल में हैं। ये लोग ‘सत्ता की हनक’ दिखाकर न केवल अवैध खनन को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि इसे सरकारी खजाने की मनमानी लूट में तब्दील कर दिया है। खनन के दौरान निर्धारित जलधारा से कहीं अधिक गहराई तक मशीनों से कोख खंगाली जा रही है। भारी पोंक लैंड मशीनें केन नदी के तट को खोखला कर रही हैं, जिससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह और जलस्तर पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इन सब गतिविधियों के खिलाफ प्रशासन अब तक चुप्पी साधे हुए है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन गुट के पास न केवल अवैध खनन की ‘मनमानी छूट’ है,बल्कि परिवहन में ओवरलोडिंग और सीमांकन से भी ऊपर उठकर बेलगाम ढंग से संचालन चल रहा है। कहा जा रहा है कि “खाकी” और “खादी” के साथ इन खनन माफियाओं का गठजोड़ है, जिसके कारण कोई भी व्यक्ति घटनास्थल पर घुसकर जांच या कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा?अवैध खनन के लिए किसानों के खेतों को जबरन रास्ता बना दिया गया है। कई ग्रामीणों ने बताया कि उनकी आजीविका के साधन तबाह हो चुके हैं। “अगर समय रहते रोक नहीं लगी, तो आने वाले वक्त में बाढ़ के पानी में डूबने से बचना लोहे के चने चबाने जैसा कठिन हो जाएगा,।

बालू माफिया के गुर्गे खुलेआम दावा करते हैं कि “हम खतरनाक शैतान हैं, और जिला प्रशासन हमारी उंगलियों पर नाचता है?” सवाल यह उठ रहा है कि जिलाधिकारी जे. रीभा कब तक चुप्पी साधे रहेंगी? क्या वह इस अवैध खनन के “तिलिस्म” को तोड़ पाएंगी? अगर इस मामले में त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, तो यह न केवल पर्यावरण के लिए घातक होगा,बल्कि प्रशासन पर भी गहरा संकट छा जाएगा !

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