कुमार गौरव
बांदा। जिले में सुरेश गुप्ता ठेकेदार का जलजला है? लगभग सारे विभाग इस ठेकेदार के लिये “श्री लक्ष्मी जी सदा सहाय” क़ी कथित भूमिका में है?

बताते हैं की जितने भी “मलाईदार विभाग” हैं, उसमें “सुरेश की बल्ले बल्ले” हैं! सभी “इनकी बलैयां”लेते हैं। इनका स्वागत का रुतबा “लल्ला -लल्ला लोरी दूध की कटोरी” की तरह माना जाता है! सूत्रों की यदि सच मानें तो सत्ता दल हो या विपक्ष इन पर राजनीतिक कृपा बरसती है? इसके चलते कथित तौर पर इनके घटिया गुणवत्ता विहीन कार्यों पर “जांच की आंच” नहीं आने पाती? कमाई का रेशियो “दूध की नदी के समान” है? जिसकी “मलाई एवं रबड़ी” कार्यदायी संस्थाओं के “टाप से बाटम” तक के अधिकारी एवं कर्मचारी “स्वाद” लेते हैं?
ठेकेदार सुरेश गुप्ता का गुणगान ,”शेष ,महेश,गणेश दिनेश” रूपी “सभी अफसर” करते है? इस ठेकेदार द्वारा कराये गये निर्माण कायों की वास्तविकता भरी जांच हो, इसके लिये फिलहाल ऐसा कोई “सूरमा भोपाली” नहीं दिखता जो इसके लिये “पान का बीड़ा” चबा सके? हालांकि ठेकेदार सुरेश अपने ऊपर इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हैं।













