कुमार गौरव
बांदा। अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए चलाए जा रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विशेष अभियान ‘ऑपरेशन शिकंजा’ के तहत बांदा पुलिस ने एक ऐसे संगठित, शातिर और खतरनाक गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने न केवल पुलिस बल्कि अदालतों की सुरक्षा प्रणाली को भी चुनौती दे रखी थी। यह गिरोह फर्जी जमानतदार बनाकर, फर्जी दस्तावेज तैयार कर, एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों में भी जमानत दिला रहा था।

यह खुलासा बुंदेलखंड की अब तक की सबसे बड़ी दस्तावेज ठगी और न्यायालय धोखाधड़ी की कहानी बनकर सामने आया है! तिंदवारी थाना पुलिस द्वारा पकड़ा गया यह गिरोह आधार कार्ड, खतौनी, फोटो, हस्ताक्षर सबकुछ फर्जी बनाकर अदालत में असली लोगों की जगह नकली जमानतदार खड़े कर देता था।

सबसे बड़ा झटका तब लगा जब एक एनडीपीएस आरोपी की जमानत में तिंदवारी के ही श्रीराम सिंह का नाम और पहचान का इस्तेमाल किया गया जबकि वह अदालत गया ही नहीं था ! पीड़ित ने पुलिस में शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने जब दस्तावेज खंगाले, तो जालसाजी का पूरा साम्राज्य खुल गया।
कोतवाली देहात क्षेत्र के मवई तिराहा पर पुलिस ने दबिश देकर गैंग के सदस्य हरिशंकर को पकड़ा। उसके पास से फर्जी आधार कार्ड, जाली खतौनी, फर्जी फोटो, कोर्ट में लगाने वाले तैयार प्रिंट और पहचान तैयार करने वाली सामग्री मिली। पूछताछ में हरिशंकर ने रैकेट का असली दिमाग उजागर कर दिया “सारे फर्जी कागज़ हेमंत तैयार करता है !” पुलिस ने तत्काल दबिश देकर हेमंत और उसके साथी बलबीर को गिरफ्तार कर लिया।













