कुमार गौरव
बांदा। पुलिस ने फर्जी जमानतदारों के खिलाफ ऐतिहासिक कार्रवाई की है। इस अभियान में मुख्य आरोपी शिवस्वरूप उर्फ मास्टर को गिरफ्तार किया गया है, जिसने 1000 से अधिक मुकदमों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमानतें ली थीं।

इस जालसाजी की पहचान 12 नवंबर 2025 को हुई, जब तिंदवारी थाने में उपनिरीक्षक शिवकरन सिंह ने बलवीर के खिलाफ फर्जी जमानत लेने का मामला दर्ज किया। इसके अगले दिन, 13 नवंबर 2025 को उपनिरीक्षक दिनेश कुमार सिंह ने शिवस्वरूप के खिलाफ फर्जी खसरा-खतौनी का उपयोग कर जमानत लेने के मामले दर्ज किए। 20 नवंबर 2025 को राम सिंह ने शिकायत की कि उनके नाम के फर्जी आधार कार्ड, खसरा-खतौनी और फोटो का इस्तेमाल कर एनडीपीएस के एक अभियुक्त की जमानत ली गई। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, खुफिया जानकारी, अभिलेख सत्यापन और मुखबिर की सूचना के आधार पर गहन जांच शुरू की।

मुख्य आरोपी शिवस्वरूप उर्फ मास्टर, पुत्र शिवलाल, निवासी ग्राम भिंडौरा, थाना तिंदवारी, को कोतवाली नगर थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर के पास से गिरफ्तार किया गया। कड़ाई से पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने और उसके साथियों ने फर्जी खसरा-खतौनी, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों का उपयोग कर लगभग 1000 मुकदमों में जमानतें दिलवाई। यह नेटवर्क केवल बांदा तक सीमित नहीं, बल्कि आसपास के अन्य जिलों में भी सक्रिय था। पुलिस अब अन्य वांछित आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने कहा, “ऑपरेशन शिकंजा के तहत हमने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी को भी फर्जी दस्तावेजों से न्यायपालिका का फायदा उठाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। ऐसे मामलों में कड़ाई से कार्रवाई की जाएगी।”













