कुमार गौरव
बांदा। जिले के विकास खंड बबेरू की ग्राम पंचायत अछरील में ग्राम समाज की भूमि पर कब्जे का मामला अब सिर्फ अवैध अतिक्रमण का विषय नहीं रह गया है, बल्कि सिस्टम की जड़ तक पसरी भ्रष्ट सांठगांठ का एक जीवंत उदाहरण बन गया है! जंगल दर्ज जमीन,मंदिर के पास स्थित पावन भूमि और शासनादेश कुछ इस कदर ताक पर रख दिए गए हैं कि एक दबंग की मनमानी के आगे पूरा तंत्र घुटनों के बल बैठा हुआ नजर आता है?

गांव के कथित दबंग विजय यादव ने ग्राम समाज की जंगल दर्ज भूमि पर न केवल अवैध रूप से बोरिंग करा ली,बल्कि अब लेखपाल और बिजली विभाग के जेई की मदद से वहां बिजली कनेक्शन, खंभा और ट्रांसफॉर्मर तक लगवा रहा है। शासनादेश के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति, लाइन ऑर्डर और सत्यापन के पूर्णतः गैरकानूनी है। फिर भी अफसरों की रहस्यमयी चुप्पी इस पूरे प्रकरण को संदिग्ध बनाती है!

शासनादेश के मुताबिक नलकूप सिर्फ निजी भूमि (भूमिधर) में ही लगाया जा सकता है। लेखपाल द्वारा भौतिक सत्यापन अनिवार्य है फिर भी सक्षम अधिकारी द्वारा लाइन ऑर्डर जारी हुआ। यानी नियम, कानून, प्रक्रिया सब कुछ एक व्यक्ति की दबंगई तले कुचल दिया गया।

पीड़ित ग्रामीणों ने यह पूरा मामला क्रमवार शिकायतों के माध्यम से एसडीएम बबेरू,एसडीओ बिजली वितरण बबेरू, अधिशासी अभियंता, मुख्यमंत्री पोर्टल और अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण खंड को भेजा है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि किसी भी अधिकारी ने मौके पर आकर जांच तक नहीं की। बल्कि उल्टा जिस अवैध संरचना को रोकना चाहिए था,उसको और अधिक तेजी से खड़ा कर दिया गया।
क्या सिस्टम इतना भ्रष्ट हो गया है कि वह अपने नियमों और कानूनों को ताक पर रखकर एक व्यक्ति की दबंगई के आगे घुटने टेक देता है? यह मामला सिर्फ एक ग्राम समाज की भूमि पर कब्जे का नहीं है,बल्कि सिस्टम की भ्रष्टता का एक जीवंत उदाहरण है? इन सवालों का जवाब तो समय ही देगा, लेकिन एक बात तय है कि इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।













