कुमार गौरव
बांदा। फाइनेंस कंपनियों में अपनी मेहनत की कमाई गंवाने वाले दर्जनों जमाकर्ताओं ने गुरुवार को जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने बड्स एक्ट 2019 के तहत उनके फंसे हुए धन की वापसी सुनिश्चित करने की मांग की है।

पीड़ितों ने बताया कि टोगो रिटेल मार्केटिंग, वी-ऑल म्यूचुअल बेनिफिट निधि, पेट्रान मिनिरल एंड मेटल्स, जीजीआई सर्विसेज, कामधेनु और पीएसीएल जैसी कई कंपनियां वर्षों तक बांदा में सक्रिय रहीं। इन कंपनियों ने विभिन्न जमा योजनाओं के तहत लोगों से बड़ी रकम निवेश कराई। बाद में सरकार ने अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप में इन कंपनियों पर प्रतिबंध लगा कर इनका संचालन बंद बंद कर दिया।

संसद ने ऐसे मामलों में निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए बड्स एक्ट 2019 लागू किया है। इस कानून के अंतर्गत राज्य सरकार ने चित्रकूटधाम मंडल, बांदा के मंडल आयुक्त को सक्षम अधिकारी नियुक्त किया है। शुरुआत में जिलाधिकारी कार्यालय के शिकायत प्रकोष्ठ में ठगी पीड़ितों के आवेदन पत्र स्वीकार किए गए, लेकिन कुछ समय बाद यह प्रक्रिया अचानक बंद कर दी गई।

पीड़ितों का कहना है कि कई लोगों ने पंजीकृत डाक के माध्यम से भी मंडल आयुक्त को भुगतान आवेदन भेजे, मगर अभी तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वर्षों से अपने पैसे वापस पाने की उम्मीद लगाए बैठे निवेशकों ने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि भुगतान पटल को दोबारा खोला जाए और बड्स एक्ट 2019 के तहत उनकी राशि की वापसी की प्रक्रिया पूर्ण की जाए। पीड़ित जमाकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही उनके आवेदन पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सामूहिक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।













