कुमार गौरव
बांदा। जिले का “खनिज विभाग बेखौफ एवं हठधर्मी है। अवैध खनन के प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी एवं खनिज निदेशक माला श्रीवास्तव का कड़ा रुख भी यहां भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग अवैध खनन को शह देने से बाज नहीं आया?” अवैध खनन रोकनें के लिये निदेशक नें कई महत्व पूर्ण बिंदु निर्धारित किये। कुछ का उल्लेख भी कर रहा हूँ।

जैसे “निदेशक माला श्रीवास्तव ने अवैध खनन और ओवर लोडिंग पर प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दे रखें हैं, जो बांदा में हवा -हवाई साबित” हो रहें हैं। खनिज अधिकारी को विशेष प्रतिकूल प्रविष्ट भी जांच में दोषी पाये जानें पर दी गई है। लेकिन फिलहाल हालत “मैं नहीं सुधरूंगा” का है। निर्देश के मुताबिक “नदी की जलधारा बांध कर खनन नहीं किया जा सकता पर ऐसा हो रहा” है। “लिफ्टर मशीनों से नदी की कोख तीन -तीन फुट से अधिक गहराई तक खंगाली जा” रही है। जिले की केन ,यमुना बागे आदि सभी में यह हो रहा है। चरका खदान खंड 8,तेरा ब,भदावल आदि बालू खदानों में “प्रत्यक्षम किम प्रमाणम की स्थिति है,पर गजब की खनिज विभाग एवं प्रशासन की खामोशी” है!पर्दे के पीछे नूरा कुश्ती की सी स्थिति है?

इसके अलावा “फिक्स बॉडी के वाहनों में ही खनिजों में परिवहन हो सकता है। बिना मैप्ड माइन टैग और बिना परिवहन पास के खनिजों का परिवहन किसी भी दशा में नहीं होना चाहिये। परिवहन पास में अनुमानतः दूरी /दायरा/अवधि गलत या अस्पष्ट नम्बर प्लेट वाले वाहनों के विरूद्ध कोई खास कार्यवाही नहीं” हो रही! नकली परिवहन पास के आधार पर/ओवरलोड परिवहन जारी है ! देखना होगा अवैध खनन एवं परिवहन यों ही चलता रहेगा या रुकेगा।













