कुमार गौरव
बांदा। “तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार रे किसानी मनवा धीरज धरे” पर दुखदाई स्थिति यह है कि “खाद के लिये अन्नदाता का धीरज औऱ धैर्य” बार -बार टूट रहा है।”राम नाम सत्य है,सत्य बोलो मुक्ति है” पर दुखदाई स्थिति है कि अन्न दाताओं को डीएवीपी के बाद यूरिया की पर्याप्त उपलब्धिता से मुक्ति” नहीं मिल रही है। खाद के लिये उसे “धरना -प्रदर्शन” को मजबूर होना पड़ रहा है।

जिले का किसान खाद के लिये “मुंगेरी लाल का सपना” बन गया है। गुस्सा बढ़ रहा है। किसानों धरना प्रदर्शन को मजबूर हैं। किसानों का आरोप है कि सुबह से केंद्र में लाइन लगानें के बाद भी जरूरत अनुसार खाद नहीं मिल रही। इसके पहले “अन्नदाता बुआई की समय” से ही खाद की समस्या से “दो -चार” हो रहा है। धरना -प्रदर्शन उसके लिये “नीयत सी बन गई” है। वह “बेचारगी का मारा” हो गया है।

दूसरी ओर कृषि अधिकारी नें आश्वासन दिया है कि अन्नदाता परेशान न हो, “शासन रूपी राम के यहां देर है लेकिन अंधेर नहीं है”। “अन्नदाता के लिये खाद के अच्छे दिन जरूर आयेंगे”। खाद आवक के लिये “छुक -छुक रफ्तार एक्सप्रेस की गति” पकड़ेगी !













