January 27, 2026 9:15 am

बांदा में मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया गया, केन नदी घाटों पर श्रद्धालुओं का मेला

कुमार गौरव

बांदा। जिले में मकर संक्रांति का पर्व मंगलवार को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही श्रद्धालु केन नदी के विभिन्न घाटों पर स्नान के लिए पहुंचने लगे। देखते ही देखते छुलछुलिया घाट समेत प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। नदी का पानी छिछला होने के कारण सबसे अधिक भीड़ छुलछुलिया घाट पर रही, जहां महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों ने स्नान के बाद भ्रमण, खरीदारी और नौका विहार का आनंद लिया।

मकर संक्रांति पर स्नान के बाद दान देने की परंपरा निभाते हुए लोगों ने गरीबों में खिचड़ी और वस्त्र वितरित किए। शहर के महेश्वरी देवी मंदिर, वामदेवेश्वर मंदिर, संकटमोचन मंदिर और काली देवी मंदिर समेत सभी छोटे-बड़े मंदिरों में गरीबों की लंबी कतारें देखी गईं। आम नागरिकों के साथ राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने भी दान-पुण्य में हिस्सा लिया।

केन नदी तट पर दिनभर मेला लगा रहा। नदी किनारे स्थित ऐतिहासिक भूरागढ़ दुर्ग में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। छुलछुलिया घाट से लोग पैदल नदी पार कर मेले में पहुंचे और मौज-मस्ती की। नौका विहार का आनंद लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए नावों का संचालन दिनभर चलता रहा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए नदी तट से लेकर रेलवे ट्रैक तक पुलिस बल की तैनाती रही।

मकर संक्रांति पर ऐतिहासिक कालिंजर और भूरागढ़ स्थित नटबली मंदिर में भी विशेष मेले का आयोजन हुआ। इस मंदिर से जुड़ी प्रेम कथा के कारण इसे स्थानीय लोग “आशिकों का मेला” भी कहते हैं। किंवदंती के अनुसार यहां दो मंदिर हैं—एक प्रेमी नटबली का और दूसरा उसकी प्रेमिका, किलेदार नोने अर्जुन सिंह की बेटी, का। हर साल बड़ी संख्या में ग्रामीण और शहरवासी इस मेले में शामिल होते हैं। अतर्रा कस्बे में प्रसिद्ध गौरा बाबा धाम पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्तों ने पूजा-अर्चना कर मंगल की कामना की और परिसर में खिचड़ी दान कर पुण्य अर्जित किया।

नरैनी कस्बे के रामचंद्र पहाड़ पर भी परंपरागत मकर संक्रांति मेला आयोजित हुआ। मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान अनुज लक्ष्मण और माता सीता के साथ एक रात इस पर्वत पर बिताई थी। तभी से इस स्थान का धार्मिक महत्व बढ़ा और स्थानीय लोगों ने यहां मंदिर बनवाकर राम, लक्ष्मण और सीता की मूर्तियों की स्थापना कर पूजा-अर्चना शुरू की। पूरा दिन बांदा जिले में धार्मिक आस्था, मेल-मिलाप और उत्सव का माहौल बना रहा। प्रशासन ने भीड़ और सुरक्षा की दृष्टि से चाक-चौबंद इंतजाम किए, जिससे श्रद्धालु बेफिक्र होकर पर्व का आनंद ले सके।

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