कुमार गौरव
बांदा। बागै नदी की भदावल बालू खदान में अवैध खनन की गतिविधियां तेजी से जारी हैं, जबकि जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। स्थानीय निवासियों और पर्यावरण संरक्षण के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित अधिकारी इस अवैध गतिविधि में कथित तौर पर मिलीभगत कर रहे हैं, जिससे न केवल राजस्व विभाग को करोड़ों का नुकसान हो रहा है, बल्कि क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

भदावल खंड में बेखौफ ढंग से चल रहा यह खनन ऑपरेशन स्थानीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन और माफिया के बीच संभावित सामंजस्य की आशंका व्यक्त की जा रही है। सवाल यह उठता है कि क्या यह प्रशासनिक चुप्पी वास्तव में एक संगठित लूट का हिस्सा है?

भदावल में गाटा संख्या 1169, 1858/3, 1133/4, 1161/3 और 1949 में अवैध खनन का तांडव चरम पर है। खदान का पट्टा मेसर्स सचिन एंटरप्राइजेज के नाम पर है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण कथित माफिया सिद्धार्थ शुक्ला और शिवचंद्र त्रिपाठी के हाथों में है। सूत्रों के अनुसार, यह माफिया दिन-रात अवैध खनन कर रहा है, जिससे स्थानीय वातावरण में डर का माहौल बना हुआ है।

जबकि खनिज अधिकारी और जिला मजिस्ट्रेट क्रियाशीलता का दावा कर रहे हैं,उनकी कार्रवाई का वास्तविक असर भी निरंतर देखने को नहीं मिल रहा है। इससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहें हैं? क्या यह प्रशासन की कमजोरी है, या इस मामले में कुछ और चल रहा है? स्थानीय समुदाय प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है।













