कुमार गौरव
बांदा। जिले की नरैनी तहसील की महुटा का “तेरा-ब खदान अवैध ‘खनन का साम्राज्य’” बन चुका है। यहां जो खेल चल रहा है,उसे देखकर लगता है कि “कानून को जंजीर में बाँध” दिया गया है? यहां अवैध खनन की अत्यधिक दबंगई है। यहां चल रहा अवैध खनन सिर्फ “कानून तोड़ने तक सीमित” नहीं बल्कि प्रशासन की आंखों के सामने खनन नीति की अनदेखी का खुला मंच” बन गया है!
तेरा-ब खदान का कथित “संचालक मोहित मिश्रा” खुद को “चित्रकूट के एक बड़े मीडिया बैनर का परिवार” बताकर बांदा और चित्रकूट में ऐसा डर और धन फैलाए बैठा है कि “अफसर उसके सामने सकपका लपलपा” जाते हैं! तेरा-ब पट्टा खदान कागज़ पर आवंटित है। अधिकांश खनन निर्धारित सीमा सें अलग महुटा में बेदर्दी से निरंतर जारी है। सीमा तोड़कर नदी को छलनी किया जा रहा है। “प्रतिबंधित हैवी पोकलैंड मशीनें रात-दिन गरज” रही हैं। ओवर लोड ट्रकों की कतारें हैं। यह सब “खुलेआम और प्रशासन सब देख” रहा है !

यह दृश्य देखकर कोई भी दंग रह जाए “नदी का रुख बदल दिया” गया। पोकलैंड “मशीनें धारा को चीरती हुई नदी के पेट में घुस” रही हैं!
कानून कहता है “राज्यपाल की अनुमति के बिना किसी नदी की धारा को बाल भर भी नहीं” मोड़ा जा सकता। लेकिन यहां “अस्थाई पुल” बना दिया है। इस खदान में क़ानून का नहीं, माफिया राज कायम हो गया है! गांव के प्रधान से लेकर ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की। पत्र लिखे,वीडियो भेजे, लेकिन न कोई छापा न एक नोटिस न मशीनें सीज़ हुई !

बड़ा प्रश्न है की क्या बांदा जिले की कुर्सियाँ भी खनन माफिया की जेब में हैं ? यह प्रशासनिक चुप्पी संदेह नहीं, सपाट सहमति लगती है! मामला सिर्फ अवैध खनन का नहीं, यह तो “क़ानून का अपमान, प्राकृतिक संसाधनों की हत्या, सरकारी राजस्व की लूट”, प्रशासनिक तटस्थता पर सवाल और “माफिया के खुल्लमखुल्ला शासन का नमूना” है? तेरा-ब खदान में सरकार नहीं, “मोहित मिश्रा की सरकार” चल रही है? जागिये डीएम जागिये।













