कुमार गौरव
बांदा। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त घोर लापरवाही गुरुवार को उस समय खुलकर सामने आ गई, जब जिलाधिकारी जे. रीभा ने जिला महिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण ने अस्पताल में फैली व्यवस्था विहीनता और स्टाफ की मनमानी को उजागर कर दिया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में 6 डॉक्टर सहित कुल 16 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। डीएम ने तत्काल सख्त कार्रवाई करते हुए इन सभी गैरहाजिर स्टाफ का एक दिन का वेतन काटने का आदेश जारी किया है।

जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में जिलाधिकारी के अचानक पहुंचने से हड़कंप मच गया। डीएम जे. रीभा ने पीएनसी वार्ड,नवजात गहन चिकित्सा इकाई,लेबर रूम और ओपीडी का गहन जायजा लिया। निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि अस्पताल स्टाफ ड्यूटी से नदारद है। अनुपस्थित पाए गए कर्मचारियों में छह डॉक्टर, दो लैब टेक्नीशियन और आठ अन्य कर्मचारी शामिल थे। डीएम ने इस लापरवाही पर सभी का वेतन काटने का आदेश दिया। पीएनसी वार्ड में नवप्रसूता महिलाओं की केस शीट तक उपलब्ध नहीं मिली, जिससे यह पता लगाना मुश्किल हो गया कि उनका उपचार किस तरह चल रहा है। इस दौरान एक स्टाफ नर्स भी अनुपस्थित पाई गई।

जिलाधिकारी ने अस्पताल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रसव के बाद प्रत्येक महिला को अनिवार्य रूप से कम से कम 48 घंटे चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रसव और नवजात देखभाल में लापरवाही के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।उन्होंने निर्देश दिया कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी डॉक्टरों और स्टाफ का ड्यूटी चार्ट बनाकर डिस्प्ले बोर्ड पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाए, ताकि मरीज और परिजन स्टाफ की उपलब्धता की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें।
डीएम जे. रीभा ने सख्त लहजे में कहा, “डॉक्टरों और नर्सों की अनुपस्थिति सीधे तौर पर महिलाओं और नवजात बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। सरकार मातृत्व स्वास्थ्य और नवजात देखभाल के लिए योजनाओं में लाखों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन जिले का प्रमुख महिला अस्पताल प्रशासनिक लापरवाही और स्टाफ की गैरहाजिरी का केंद्र बन गया है।”
डीएम की इस सख्त कार्रवाई के बाद जिला महिला चिकित्सालय प्रशासन में हड़कंप है।सभी को ड्यूटी पर सख्ती से पालन करने की हिदायत दी गई है।













