कुमार गौरव
बांदा। जिले में मनरेगा मजदूरों के लंबित भुगतान को लेकर राजनीतिक तूफान उठ खड़ा है। जिला कांग्रेस कमेटी ने आज मुख्य विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए सरकार और प्रशासन पर मजदूरों के “हक मारने” का गंभीर आरोप लगाया और सख्त चेतावनी दी कि यदि कुछ दिनों के भीतर करोड़ों रुपये का बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो पार्टी सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय पर ज्ञापन देकर सरकार पर हमला बोला। दीक्षित ने कहा कि मनरेगा मजदूरों और ग्राम रोजगार सेवकों को महीनों से उनकी मेहनत का पैसा नहीं मिल रहा है। “यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकारों के साथ सीधा अन्याय है। मजदूर जो रोज-रोज की कमाई पर अपना गुजारा करते हैं, आज भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।” कांग्रेस के अनुसार, बांदा जिले सहित पूरे उत्तर प्रदेश में मनरेगा के तहत काम कर रहे हजारों मजदूरों का करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि वर्तमान सरकार की नीतियों के चलते गरीबी रेखा से नीचे जीवन जी रहे मजदूरों का शोषण चरम पर पहुंच गया है। “मनरेगा जैसी राष्ट्रीय योजना को गरीबों को रोजगार और आर्थिक सुरक्षा देने के लिए बनाया गया था,” कहा दीक्षित ने। “लेकिन आज यह योजना अपने मूल उद्देश्य से इतनी दूर चली गई है कि मजदूरों को उनकी मेहनत का पैसा भी नहीं मिल रहा। यह केवल त्रुटि नहीं, बल्कि सिस्टम के संवेदनहीन होने का सबूत है।”

कांग्रेस ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से तत्काल मांग की है कि सभी मनरेगा मजदूरों और ग्राम रोजगार सेवकों के लंबित भुगतान की राशि तुरंत जारी की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए सख्त निगरानी व जवाबदेही प्रणाली लागू की जाए। दीक्षित ने साफ तौर पर चेतावनी दी, “यदि सरकार और प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी। प्रदर्शन, धरना, घेराव और अन्य आंदोलन के तरीके अपनाए जाएंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन पर होगी।” कांग्रेस नेता के अनुसार, कई मजदूर परिवारों के बच्चे भूखे सो रहे हैं, घरों में दवाइयां तक नहीं आ रहीं। ऐसे समय में सरकार की उदासीनता ने जनता के विश्वास को डगमगा दिया है। इस मामले पर अब सत्तारूढ़ दल के खिलाफ राजनीतिक दबाव बढ़ने की आशंका है।










