कुमार गौरव
बांदा। जिले में बारह हजार छात्रों की जान खतरे में हैं। बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल इस स्थिति से हैरान है और परेशान हैं। जान बचाने के लिये वह एक साल से लगाम कस रहें हैं पर अब तक सार्थक परिणाम सामने नहीं आ सके! खौफनाक मंजर की खबर समझ लीजिये। जिले में कुछ ऐसे परिषदीय विद्यालय हैं जहां मौत के साये में छात्रों एवं शिक्षकों के दिल भय से धड़कते रहते हैं। नौनिहाल व शिक्षकों पर मौत मंडराती हैं।

आप को बता दे की जिले के 74 विद्यालयों के भवनों के ऊपर से 11 हजार वोल्ट की लाइन है। स्पार्किंग व तेज हवाओं के बीच कभी तार टूटकर बड़े हादसे को दावत दे सकते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के अनुरोध के बावजूद लाइन नहीं शिफ्ट की गई ।
जिले में 1750 जूनियर व प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें करीब सवा दो लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। 74 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां भवनों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन है। तेज आंधी में ये तार टूटकर नीचे गिरते रहते हैं। ऐसे में इन 74 विद्यालयों में पढ़ रहे करीब दस हजार बच्चों व एक सैकड़ा शिक्षकों के सिर पर हमेशा मौत नाचती है।

प्रधानाध्यापकों से लेकर बीएसए तक सभी ने बिजली विभाग के अधिकारियों से लाइन शिफ्ट कराने का अनुरोध कर चुके हैं पर लापरवाही यह है की वर्षों से इस गंभीर मसले को लेकर कोई कार्रवाई नही हुई । नरैनी क्षेत्र में ऐसे विद्यालय ज्यादा हैं, जहां भवन के ऊपर से हाईटेंशन लाइन है। इनमें गया प्रसाद का पुरवा, आऊ, छततूपुर, राजाडांडी, प्रतापपुर, गुढ़ाकला, पुकारी, नहरी, खोरिया, कहला, तुर्रा, ओरहा, ऐंचवारा, पड़मई, जबरापुर, कहला, तुर्रा व कस्तूरबा गांधी विद्यालय सहित 22 स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा महुआ में 15, तिदवारी में 13, कमासिन में आठ, बबेरू में छह, जसपुरा व बिसंडा में चार-चार स्कूल शामिल हैं। बेसिक शिक्षा निदेशक बघेल ने यहां बेसिक शिक्षा अधिकारी अव्यक्त राम को इस बाबत एक साल पूर्व भी पत्र भेजा था कि प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल भवनों के ऊपर से गुजरी एचटी लाइन तुरंत शिफ्ट कराई जाए। बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है। लाइन शिफ्टिग की कार्रवाई से उन्हें अवगत कराया जाए।













