कुमार गौरव
बांदा। नरैनी क्षेत्र के लहुरेटा गांव के मजरा रंजीतपुर में युवाओं की खेल की आशाएं सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़े की भेंट चढ़ गई हैं। नवयुवक मंडल के नाम से प्रस्तावित खेल मैदान की जमीन वर्षों से अतिक्रमण की चपेट में है, जिसके चलते गांव के युवाओं के पास खेलने के लिए एक समुचित स्थान तक नहीं है।

लहुरेटा ग्राम पंचायत, जिसकी आबादी लगभग छह हजार है और जहां करीब चार हजार मतदाता निवास करते हैं, में खेलों के प्रति रुचि रखने वाले दो सौ से अधिक युवा हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी आबादी वाले गांव में न तो कोई स्टेडियम है और न ही कोई उचित खेल मैदान। इस वजह से युवा मजबूरी में अपनी खेल गतिविधियों के लिए खलिहानों का सहारा लेते हैं। प्रशासन ने कभी मजरा रंजीतपुर में युवाओं के लिए खेल मैदान बनाने की योजना बनाई थी और इसके लिए जमीन भी आवंटित की थी। लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी यह मैदान धरातल पर नहीं उतर सका। इसकी सबसे बड़ी वजह आवंटित जमीन पर ग्रामीणों द्वारा कब्जा कर उस पर बारी (बाड़) और टिनशेड लगा लेना बताया जा रहा है।

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मोहम्मद आरिफ ने इस समस्या की पुष्टि करते हुए बताया कि मैदान की जमीन पर कई वर्षों से अतिक्रमण कायम है। उन्होंने कहा, “इसकी जानकारी ग्राम विकास कार्यालय को दी जा चुकी है, लेकिन आज तक जमीन को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जा सका है।” प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले में कोई ठोस पहल नज़र नहीं आ रही है। ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) प्रमोद कुमार ने बताया कि अतिक्रमण की सूचना लिखित रूप से तहसील मुख्यालय को भेजी जा चुकी है, लेकिन तहसील प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, ग्रामीणों और युवाओं का आरोप है कि सरकार युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए योजनाएं तो चला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि उदासीन बने हुए हैं। उनका कहना है कि अतिक्रमण के कारण गांव में खेल मैदान का सपना अधूरा पड़ा है और युवा वर्ग अपनी खेल प्रतिभा को निखारने के अवसर से वंचित हो रहा है।
इस मामले में प्रशासनिक देरी और उदासीनता गांव के युवाओं के लिए निराशा का कारण बन गई है। अब देखना यह है कि युवाओं के इस जायज़ हक और उनके सपनों को पूरा करने के लिए अधिकारी कब ठोस कार्रवाई करते हैं और खेल मैदान को अतिक्रमण मुक्त करा पाते हैं।











