March 3, 2026 5:32 pm

सहकार से समृद्धि के तहत अर्थव्यवस्था को मजबूती: बी-पैक्स व्यवस्था से किसानों को मिलेगा लाभ

सहकार से समृद्धि के तहत अर्थव्यवस्था को मजबूती: बी-पैक्स व्यवस्था से किसानों को मिलेगा लाभ
  • कुमार गौरव

बांदा। बुंदेलखंड जैसे कृषि प्रधान लेकिन संसाधन-संकटग्रस्त क्षेत्र में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सहकारिता एक बार फिर मजबूत आधार बनकर उभर रही है। सहकार से समृद्धि की ओर योजना के तहत जिले में बेंदा के बाद अब पिंडारन में नई बी-पैक्स (ब्लॉक प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटी) सहकारी समिति का गठन किया गया है। इस समिति का शुभारंभ उर्वरक बिक्री के साथ हुआ, जिससे किसानों को सीधे तौर पर इसका लाभ मिलना शुरू हो गया है। पिंडारन बी-पैक्स की स्थापना के साथ ही जिले में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर 49 हो गई है। यह पहल न केवल कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगी।

सहकार से समृद्धि के तहत अर्थव्यवस्था को मजबूती: बी-पैक्स व्यवस्था से किसानों को मिलेगा लाभ

अब तक किसानों को खाद, बीज और ऋण के लिए कस्बों और शहरों का रुख करना पड़ता था, जिससे समय, श्रम और धन की बर्बादी होती थी। पिंडारन में बी-पैक्स के गठन से किसानों को गांव में ही उर्वरक, बीज, कृषि ऋण और अन्य सहकारी सेवाएं उपलब्ध होंगी। इससे खेती की लागत कम होगी और समय पर कृषि कार्य संभव हो सकेगा। नवगठित बी-पैक्स समितियों को केवल पारंपरिक ढांचे तक सीमित नहीं रखा गया है। इन्हें डिजिटल सेवाओं से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे किसानों को पारदर्शी लेन-देन, योजनाओं की जानकारी और त्वरित सेवाएं मिल सकें। सहकार से समृद्धि की ओर योजना का मूल उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और गांवों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है। सहकारी समितियों के माध्यम से सामूहिक शक्ति को बढ़ावा देकर छोटे और सीमांत किसानों को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अंसल ने बताया कि जिले में एक दर्जन नई सहकारी समितियों के गठन की योजना तैयार की गई है। बेंदा और पिंडारन के बाद अन्य गांवों में भी जल्द बी-पैक्स समितियां स्थापित की जाएंगी। इन समितियों को उर्वरक, बीज, ऋण के साथ-साथ डिजिटल और बैंकिंग सेवाओं से सशक्त बनाया जाएगा।

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