- कुमार गौरव
बांदा। स्वास्थ्य महकमे की धड़कन माने जाने वाले एनएचएम संविदा कर्मचारियों का सब्र जवाब देने लगा है। वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी के विरोध में कर्मचारियों ने तीखा रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी को प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश शासन के नाम ज्ञापन सौंप दिया। यह कदम 11 से 13 फरवरी तक चले प्रदेशव्यापी अभियान के तहत उठाया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ, बांदा के जिलाध्यक्ष डॉ. मिलिंद सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने एकजुट होकर कहा “काम पूरा, वेतन अधूरा अब नहीं चलेगा!”
– दो माह से वेतन बंद, आर्थिक संकट गहराया
संघ का आरोप है कि कर्मचारियों को दो महीने से अधिक समय से मानदेय नहीं मिला है। प्रदेशभर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत करीब डेढ़ लाख संविदा कर्मचारी तैनात हैं, जिन्हें जुलाई 2025 से ही नियमित और समयबद्ध भुगतान नहीं मिल पा रहा। कर्मचारियों का कहना है कि वे महामारी से लेकर टीकाकरण और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं तक हर मोर्चे पर डटे रहे, लेकिन बदले में उन्हें आर्थिक असुरक्षा और अनिश्चितता मिली। कई कर्मचारियों ने बताया कि घर का खर्च, बच्चों की फीस और बैंक की किस्तें चुकाना मुश्किल हो गया है।
– अंतिम चेतावनी: सात तारीख तक भुगतान नहीं तो काम ठप
संघ ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रत्येक माह की सात तारीख तक वेतन भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो ‘नो पे-नो वर्क’ की तर्ज पर कार्य बहिष्कार किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाएं बाधित नहीं करना चाहते, लेकिन लगातार उपेक्षा से अब आंदोलन ही विकल्प बचा है। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो जिला मुख्यालय पर शांतिपूर्ण लेकिन व्यापक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। अब नजरें शासन स्तर पर टिकी हैं। क्या कर्मचारियों की मांगें समय पर पूरी होंगी या प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट गहराएगा ?











