March 3, 2026 6:51 pm

53वें रामायण मेले का दिव्य आगाज़:संतों की वाणी और संस्कृति की चमक से जगमगाया चित्रकूट

53वें रामायण मेले का दिव्य आगाज़:संतों की वाणी और संस्कृति की चमक से जगमगाया चित्रकूट
  • कुमार गौरव

चित्रकूट। चित्रकूट की पावन धरती एक बार फिर राममय हो उठी, जब 53वें राष्ट्रीय रामायण मेला महोत्सव का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और दीपों की अलौकिक आभा के बीच हुआ। पूरा वातावरण श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर नजर आया। मेला ऐसा सजा कि लगा मानो समय ने करवट ली हो और त्रेता युग वर्तमान में उतर आया हो। महोत्सव का उद्घाटन जगद्गुरु राघवाचार्य जी महाराज, उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अजीत कुमार तथा जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद ने दीप प्रज्वलित कर किया।53वें रामायण मेले का दिव्य आगाज़:संतों की वाणी और संस्कृति की चमक से जगमगाया चित्रकूट
उद्घाटन सत्र में अपने ओजस्वी संबोधन में जगद्गुरु राघवाचार्य जी महाराज ने कहा कि रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन का संपूर्ण मार्गदर्शक है। उन्होंने मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इसके आदर्श और मर्यादाएं आज भी समाज को नैतिक दिशा प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि चित्रकूट सदियों से तप, त्याग और धर्म साधना की भूमि रही है, जहां रामायण की आत्मा आज भी स्पंदित होती है।53वें रामायण मेले का दिव्य आगाज़:संतों की वाणी और संस्कृति की चमक से जगमगाया चित्रकूट
न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि गोस्वामी तुलसीदास का संदेश स्पष्ट है जो व्यक्ति जिस कर्म में संलग्न है, यदि वह उसे सत्यनिष्ठा और ईमानदारी से निभाए, तो वही उसकी ईश्वर भक्ति है। उन्होंने रामायण को नैतिक मूल्यों, न्याय और आदर्श जीवन की सर्वोच्च पाठशाला बताया।

53वें रामायण मेले का दिव्य आगाज़:संतों की वाणी और संस्कृति की चमक से जगमगाया चित्रकूट
राज्य मंत्री रामकेश निषाद ने कहा कि राष्ट्रीय रामायण मेला केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति की वैश्विक पहचान है। उन्होंने बताया कि रामायण का अनुवाद विश्व की अनेक भाषाओं में हो चुका है और जहां-जहां भारतीय संस्कृति का सम्मान है, वहां रामकथा की गूंज भी सुनाई देती है। उन्होंने चित्रकूट को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की तपोभूमि बताते हुए इसे देश की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

53वें रामायण मेले का दिव्य आगाज़:संतों की वाणी और संस्कृति की चमक से जगमगाया चित्रकूट
महोत्सव में देशभर से पधारे संत-महात्माओं, विद्वानों और कलाकारों का विधिवत सम्मान किया गया। कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया, महामंत्री करूणा शंकर द्विवेदी, स्वागताध्यक्ष एवं पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र, राजा बाबू पांडेय और प्रद्युम्न दुबे ‘लालू’ ने अतिथियों को अंगवस्त्र, श्रीफल और माल्यार्पण कर सम्मानित किया। इससे पूर्व चित्रकूट परिक्षेत्र के विभिन्न अखाड़ों के संत-महंत बैंड-बाजों और अपने-अपने ध्वज-निशानों के साथ भव्य शोभायात्रा में शामिल हुए। निशानों की विधिवत पूजा और संतों के जयघोष ने आयोजन को दिव्यता से भर दिया। विद्वत गोष्ठियों में रामायण के गूढ़ रहस्यों और समकालीन प्रासंगिकता पर गहन मंथन हुआ। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भक्ति संगीत, नृत्य-नाटिकाओं और लोक प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। देर रात तक चलता रहा यह आयोजन आस्था और संस्कृति का विराट उत्सव बन गया।

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