March 3, 2026 2:30 pm

बिसंडा ब्लॉक में 8 करोड़ के भ्रष्टाचार के मामले में जांच दबाने की कवायद, डीएम जे रीभा के लिए बना चैलेंज

कुमार गौरव

बांदा। जिले के बिसंडा क्षेत्र पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर हुए लगभग आठ करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद पूरा प्रशासनिक तंत्र हिल गया है। इस मामले में अब न सिर्फ जांच दबाने की कोशिशें तेज हो गई हैं, बल्कि गोपनीय तरीके से साक्ष्य नष्ट करने और नए निर्माण कार्य शुरू करने की घटनाओं ने इसे डीएम जे रीभा के लिए एक बड़ी चुनौती बना दिया है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों के दौरान बिसंडा ब्लॉक में एक ही ठेकेदार को छह करोड़ रुपये की सामग्री आपूर्ति के ठेके दिए गए, जिसका भुगतान बिना किसी काम के कर दिया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि मजदूरी के नाम पर लगभग दो करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान भी ठेकेदार के खाते में कर दिया गया। इस तरह कुल मिलाकर आठ करोड़ रुपये के वित्तीय घालमेल की बात सामने आ रही है। इस मामले के खुलासे के बाद डीएम जे रीभा ने मामले की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव, पंचायती राज को आधिकारिक पत्र लिखा। लेकिन जांच के आदेश के बाद भी अधिकारियों और ठेकेदारों ने मामले को दबाने के लिए नई रणनीति अपनाई है। कथित तौर पर, वे उन्हीं सड़कों का निर्माण करवा रहे हैं, जिनका भुगतान पहले ही बिना निर्माण के कर दिया गया था।

खास तौर पर चर्चा में है कैरी गांव और लौली टीकामऊ गांव में सड़क निर्माण का मामला। बताया जा रहा है कि कैरी गांव में मुख्य सड़क से रामस्वरूप पटेल के मकान तक और लौली टीकामऊ में मुख्य सड़क से विनोद के प्लाट तक नई सीसी सड़कें रातों-रात बना दी गई हैं। कुछ अन्य सड़कों पर भी निर्माण सामग्री डाल दी गई है। इसी के साथ, उन मजदूरों के नाम पर जिनके खातों में भुगतान का दावा किया गया था, अब उनसे “लिखित प्रमाण” लिए जा रहे हैं कि उन्हें भुगतान मिला है। ऐसा लग रहा है मानो प्रमाणों को वैध बनाने के लिए फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, एक ही बोर्ड द्वारा कई सालों तक कार्ययोजनाओं को डाला गया, जबकि वास्तविकता में उन योजनाओं के निर्माण का काम नहीं हुआ। साथ ही, सादे पेज अपलोड करके पारदर्शिता को धज्जियों में उड़ाया गया।

इस बीच, अतर्रा के एसडीएम राहुल द्विवेदी, जो बिसंडा ब्लॉक के तीन महीने के प्रभारी बीडीओ हैं, ने ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर गलत डेटा अपलोड किए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा किया गया है, तो वे संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराएंगे। इसके बाद से ठेकेदार और अधिकारी उन्हें “मनाने की कोशिश” में लगे हुए हैं, जिससे घोटाले में ऊंचे स्तरों के संलिप्त होने की आशंका बढ़ गई है। मुख्य विकास अधिकारी अजय पांडे ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच शासन स्तर पर चल रही है और प्रभारी बीडीओ को नए निर्माण कार्य या दस्तावेजों में हेरफेर से रोका गया था। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है, तो शासन को अवगत कराया जाएगा। हालांकि, सवाल यह उठ रहा है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद MDO खुद तत्काल स्थलीय निरीक्षण क्यों नहीं कर रहे? यह चुप्पी भी संदेह को बढ़ा रही है।

डीएम जे रीभा के लिए यह मामला अब सिर्फ एक जांच का विषय नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी छवि के लिए एक परीक्षा बन गया है। क्या वह इस घोटाले के साक्ष्यों को सही तरीके से इकट्ठा कर पाएंगी? क्या रातों-रात बनाई गई सड़कों की गुणवत्ता और वैधता की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? क्या फर्जी भुगतान करने वाले ठेकेदारों और सहयोगी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी? इन सवालों का जवाब न सिर्फ बिसंडा के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे जिले के जनता की सरकार पर अपनी भरोसे की डिग्री तय करेगा।

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