March 3, 2026 2:28 pm

बांदा में सोना खदान में जमकर चल रही बालू की लूट: प्रशासन खामोश

कुमार गौरव

बांदा। जिले में स्थित “सोना घाट” नामक मौरंग खदान से सोने जैसी मानी जाने वाली उच्च गुणवत्ता की बालू की सरेआम लूट जारी है। बिना किसी अधिकृत अनुमति के छुटभैया और दबंग तत्व बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर रहे हैं, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। पट्टाधारक इस बढ़ते अवैध खनन से परेशान हैं और प्रशासन की खामोशी पर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, केन नदी के किनारे स्थित इस “सोना घाट खदान” में रोजाना सैकड़ों मोटरसाइकिलों के जरिए बालू निकाली जा रही है। यह बालू फिर ट्रैक्टर, डीसीएम और ई-रिक्शा के जरिए भूरागढ़ त्रिवेणी मोड़ से लेकर बाईपास चौराहे तक कई स्थानों पर ढेर लग जाती है। इन ढेरों से बालू शहर के विभिन्न निर्माण स्थलों पर पहुंचाई जा रही है। खास बात यह है कि इस खदान का पट्टा पिछले वर्ष एक कंपनी को दिया गया था, लेकिन इस वर्ष अभी तक आधिकारिक रूप से खनन कार्य शुरू नहीं हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, मार्च तक खदान को वैधानिक रूप से संचालित किया जा सकता है। लेकिन इसके पहले ही अवैध तरीके से बालू की खुदाई करके राज्य के खनिज संसाधनों की लूट जारी है। पट्टाधारकों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर खनिज विभाग, पुलिस और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की संवेदनशीलता के कारण यह अवैध खनन बेलगाम हो गया है। आरोप है कि इन तस्करों को “संरक्षण” मिला हुआ है, जिसके चलते वे खुलेआम रात-दिन बालू निकालते हैं।

“यह निगहबानी नहीं, बल्कि चुपचाप चल रही साजिश है,” “सीएम योगी के नाम पर खनिज खजाने की हिफाजत का नारा दिया जाता है,लेकिन यहां उनके चौकीदार ही चुपचाप लूट का नजारा देख रहे हैं।” सोना घाट के नाम के पीछे एक कारण है यहां की बालू अत्यधिक शुद्धता वाली होती है, जिसे निर्माण उद्योग में “सोना बालू” के नाम से जाना जाता है। इसलिए यह खदान क्षेत्र का सबसे अमूल्य खनिज स्रोत माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में ही यहां से कई करोड़ रुपये की बालू चोरी-छिपे निकाली जा चुकी है। ई-रिक्शा चालक तो खुलेआम दिन-रात अवैध बालू की परिवहन करते हुए देखे जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार अधिकारियों को इस बारे में शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

योगी आदित्यनाथ सरकार ने खनन माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का दावा किया है और खनिज तस्करी पर लगातार कार्रवाई की घोषणा की है। लेकिन बांदा में चल रहे इस खेल ने सरकार की इन सख्तियों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आरोप है कि यहां अवैध खनन के पीछे ऐसे लोग हैं जो प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण का फायदा उठा रहे हैं। जब तक कोई तत्काल कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह खेल जारी रहेगा। पट्टाधारक सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर खदान वैध रूप से शुरू भी होता है, तो इतनी बड़ी मात्रा में बालू के गायब होने से उनको भारी नुकसान होगा। आम जनता का सवाल है आखिर सरकार के खनिज खजाने की रखवाली कौन कर रहा है? और कब तक यह सोने की खुदाई के नाम पर चल रही लूट बर्दाश्त की जाएगी?

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