- कुमार गौरव
बांदा। मंडल का तमगा मिले 23 साल बीत गए, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था कस्बों से भी बदतर है। दो दशकों से ज्यादा होने के बावजूद प्रदेश सरकार और खासकर पुलिस महकमा मंडल मुख्यालय बांदा में ट्रैफिक व्यवस्था को मंडल स्तर का नहीं बना सका।

17 लाख से ज्यादा का आंकड़ा पार कर चुके जिले के मुख्यालय सहित अन्य उप नगर/कस्बे रोजाना बदहाल और अस्त-व्यस्त ट्रैफिक व्यवस्था से जूझ रहे हैं। यातायात पुलिस ने अब तक यहां अधिकारियों की नियुक्ति ही नहीं कर पाई है। होमगार्डों से यातायात संभाला जा रहा है।

सिविल पुलिस कानून व्यवस्था बरकरार रखने के अपने मुख्य काम को छोड़कर ट्रैफिक संभालने में अपनी ऊर्जा और समय गंवा रही है। आरटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप शुक्ल द्वारा मांगी गई सूचना में अपर पुलिस अधीक्षक/प्रभारी यातायात ने बताया कि जनपद में यातायात पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक और उप निरीक्षक के पद स्वीकृत नहीं हैं।











