कुमार गौरव
बांदा। मृत्युदंड की सजा पाए इंजीनियर रामभवन और उनकी पत्नी दुर्गावती की फांसी कहाँ होगी यह तो तय नहीं है फिलहाल वह बांदा मंडल कारागार में ही रहेंगे। जेल प्रशासन के अनुसार, दंपति को न तो फांसी के लिए नैनी जेल (प्रयागराज) भेजा जाएगा और न ही पत्नी को नारी निकेतन लखनऊ। दोनों को फिलहाल यहीं रखा जाएगा,। रामभवन, जो पेशे से एक सरकारी इंजीनियर थे, को सीबीआई ने वर्ष 2020 में यौन शोषण के एक बड़े मामले में गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ सीबीआई ने कुल सात मामले दर्ज किए थे, जिनमें से एक मामले में उन्हें और उनकी पत्नी को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। शेष छह मामले अभी न्यायालयों में विचाराधीन हैं।

जेलर आलोक कुमार के अनुसार, “चूंकि रामभवन और दुर्गावती के खिलाफ अन्य मामले अभी चल रहे हैं, ऐसे में उन्हें नैनी जेल या नारी निकेतन लखनऊ नहीं भेजा जा सकता। कारागार नियमावली के तहत, जब किसी सजा प्राप्त कैदी का पति या रिश्तेदार दूसरी जेल में होता है तो महिला कैदी को उसी जेल में रखने का प्रावधान है। इसी आधार पर दुर्गावती को भी बांदा जेल में ही रखा गया है।” जल्द ही सुप्रीम कोर्ट या राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका की सुनवाई के बाद फांसी की तारीख घोषित हो सकती है।

रामभवन और दुर्गावती के खिलाफ सुनाई गई मृत्युदंड की सजा का आधार बच्चों के साथ यौन शोषण का है। न्यायालय ने इसे “संवेदनहीन, सुनियोजित और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के खिलाफ गंभीर अपराध” बताते हुए सख्त सजा सुनाई। जेल में बंद रामभवन की मानसिक स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, वह पिछले कुछ दिनों से बेचैन हैं, रात-दिन बेचैनी में करवटें बदल रहे हैं। उनकी पत्नी दुर्गावती भी भावनात्मक रूप से टूटी हुई हैं। दंपति अब अपने अंतिम दिनों की गिनती बांदा जेल में ही कर रहे हैं।











