कुमार गौरव
बांदा। मरौली बालू खदान खंड पांच एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार खदान पर लगे आरोपों ने न केवल प्रशासन बल्कि आम जनता के लिये भी चौंकाने वाले हैं? चर्चाएं हैं कि मरौली बालू खदान खंड पांच केवल अवैध खनन का अड्डा ही नहीं, बल्कि अब मादक पदार्थों की तस्करी का भी सुरक्षित गलियारा बन चुकी है? इन गंभीर आरोपों ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं?

क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि खदान संचालक संजीव गुप्ता और स्थानीय थाना पुलिस के बीच गहरे संबंध हैं! खदान संचालक और पुलिस अधिकारी ‘भ्रष्टाचार के एक ही हमाम में नहा रहे हैं’? जिसके चलते नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं! यदि ग्रामीणों की मानें तो पुलिस की कथित अनभिज्ञता इस मिलीभगत का ही परिणाम है, जिसके चलते अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के बजाय उन्हें संरक्षण मिल रहा है!

ग्रामीणों में उठ रही चर्चाओं को यदि सच मानें तो इस खदान से से लोड होकर बाहर जाने वाले प्रत्येक ट्रक की सघन चेकिंग होनी चाहिए। उनका संदेह है कि बालू के ट्रकों की आड़ में मादक पदार्थों (नशीले पदार्थों) की खेप दूसरे जनपदों और राज्यों तक पहुंचाई जा रही है। ग्रामीणों का तर्क है कि जो संचालक खदान नियमों की अनदेखी कर धड़ल्ले से अवैध खनन कर रहा है, उसके लिए तस्करी करना कोई बड़ी बात नहीं है? प्रश्न यह भी उठ रहा है कि क्या अन्य संबंधित अधिकारी भी इन गतिविधियों में मूकदर्शक बने हुए हैं? यदि इन चर्चाओं में तनिक भी सच्चाई है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है! चर्चा यह भी है कि जिस तरह खदान संचालक अपनी मनमानी कर रहे हैं, उससे लगता है कि उन्हें किसी का डर नहीं है!
इन स्थितियों को देखते हुए जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को इन चर्चाओं की सत्यता की तह तक जाना चाहिये ! लोगों का कहना है कि चाहे ये चर्चाएं गलत ही क्यों न हों, लेकिन इनकी पुष्टि के लिए निष्पक्ष और सघन जांच जरूरी है। “पता नहीं किस भेष में रावण मिल जाए” वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते इन आरोपों की जांच नहीं हुई, तो यह क्षेत्र मादक पदार्थों का बड़ा केंद्र बन सकता है?










