अन्ना प्रथा से परेशान किसानों के लिए सपा नेता ने सरकार से की ‘जाल बाड़ी’ योजना की मांग

कुमार गौरव

बांदा। बुंदेलखंड में अन्ना पशुओं (आवारा मवेशियों) की समस्या से त्रस्त किसानों को राहत दिलाने के लिए समाजवादी पार्टी के प्रांतीय कार्य समिति सदस्य अशोक सिंह गौर ने सरकार से एक बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने खेतों की सुरक्षा के लिए ‘जाल बाड़ी’ (फेंसिंग) पर सरकार से 80 प्रतिशत अनुदान दिए जाने की मांग की है।

सपा नेता अशोक सिंह गौर ने सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘सौर ऊर्जा आधारित झटका मशीन’ योजना पर सवाल उठाते हुए इसे धरातल पर विफल बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में खेतों में लगाई जा रही झटका मशीनें बेअसर साबित हो रही हैं। जानवर करंट लगने के बावजूद खेतों के भीतर कूद जाते हैं, जिससे किसानों की फसलें पूरी तरह चौपट हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यह तकनीक किसानों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है।अशोक सिंह गौर ने तर्क दिया कि यदि सरकार वास्तव में किसानों की खुशहाली चाहती है, तो उसे अपनी रणनीति बदलनी होगी। उन्होंने मांग की कि सरकार खेतों की घेराबंदी के लिए किसानों को ऐंगिल और जाली (फेन्सिंग) खरीदने पर 80 प्रतिशत का अनुदान प्रदान करे। उनके अनुसार, खेतों की स्थायी घेराबंदी ही एकमात्र ऐसा उपाय है जिससे फसलों को अन्ना पशुओं से सुरक्षित रखा जा सकता है।

सपा नेता ने कहा कि बुंदेलखंड के किसान पहले से ही सूखे और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ऐसे में फसल का पूरी तरह नष्ट हो जाना उनके लिए कमरतोड़ साबित होता है। यदि खेतों में जाल बाड़ी की व्यवस्था हो जाती है, तो किसान निश्चिंत होकर खेती कर पाएंगे, जिससे क्षेत्र में खुशहाली का रास्ता खुलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द ही कोई ठोस नीति बनाएगी, ताकि बुंदेलखंड का अन्नदाता और उसकी फसल दोनों सुरक्षित रह सकें।

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