विनोद मिश्रा
बाँदा। राजनीति से ऊपर उठकर जब कोई नेता सेवा को धर्म बना ले तो वह इतिहास पुरुष कहलाता है। पूर्व विधायक दलजीत सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनके लिए कुर्सी नहीं, करुणा सबसे बड़ी है। तिंदवारी विधानसभा के ग्राम अलोना स्थित बजरंगबली धाम में निःशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर लगाकर उन्होंने सैकड़ों आंखों में उजाला भर दिया। शिविर में 150 ग्रामीणों की आंखें जांची गईं। 84 जरूरतमंदों को मौके पर ही चश्मे थमाए गए। मोतियाबिंद से जूझ रहे 12 मरीजों को निःशुल्क ऑपरेशन के लिए चित्रकूट भेजा गया। पर ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। यह दलजीत सिंह के सेवा भाव की वह रोशनी है जो अलोना के हर घर तक पहुंची।

शिविर के बाद दलजीत सिंह ने कहा कि मेरे लिए सबसे बड़ा धर्म मानवता है और सबसे बड़ा संगठन सेवा है। गांव में बैठा गरीब जब महंगे इलाज के लिए तरसता है तो हमारा फर्ज बनता है कि डॉक्टर को उसके दरवाजे तक ले जाएं। उन्होंने सभी चिकित्सकों और कार्यकर्ताओं को इस पुण्य काम का असली हीरो बताया। चश्मा पहनते ही 70 साल के रामसजीवन की आंखें भर आईं। बोले, बेटा बरसों बाद पोते का चेहरा साफ दिखा है। यह दलजीत भैया की देन है। मोतियाबिंद से परेशान सुंदरी देवी को जब बताया गया कि उनका ऑपरेशन फ्री होगा तो उन्होंने दोनों हाथ उठाकर आशीष दिया। गांव की गलियों में आज सिर्फ एक ही चर्चा थी, दलजीत भैया जैसा कोई नहीं।

दलजीत सिंह पहले भी सैकड़ों नेत्र शिविर लगाकर हजारों लोगों की जिंदगी रोशन कर चुके हैं। इसी जज्बे ने उन्हें नेत्रदान का अभिप्राय बना दिया है। अलोना का यह शिविर भी उसी श्रृंखला की एक कड़ी था। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना उनके लिए राजनीति नहीं, प्रायश्चित है। समाज का कर्ज उतारने का जरिया है। पूर्व विधायक दलजीत ने वादा किया कि यह सिलसिला थमेगा नहीं। तिंदवारी की हर पंचायत तक नेत्र शिविर पहुंचेगा। कोई गरीब अंधेरे में जिंदगी न गुजारे, यही मेरा संकल्प है। उनके इस ऐलान पर पूरे बजरंगबली धाम परिसर में तालियां गूंज उठीं। फिलहाल अलोना गवाह बना उस सेवा भाव का जो सत्ता से नहीं, संवेदना से निकलता है। दलजीत सिंह ने दिखा दिया कि जब नेता सेवक बन जाए तो बजरंगबली धाम जैसे शिविर सिर्फ इलाज नहीं करते, उम्मीद बांटते हैं। और उम्मीद से बड़ी कोई दवा नहीं होती।











