कुमार गौरव
बांदा। रबी फसल की बोआई में जरूरी डीएपी खाद का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। मांग कम नहीं हो रही है। समितियों में सरकारी रेट में मिलने वाली डीएपी की चाहत में किसान प्रतिदिन लाइन में लग रहे हैं। विभागीय दावा है की इस बार 10 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा खाद के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक आठ हजार से ज्यादा मीट्रिक टन खाद का वितरण हो चुका है।

चिंतनीय स्थिति का अंदाजा इसी सें लगाया जा सकता है की बांदा मंडी समिति में खुले केंद्र 17 नवंबर के बाद से अग्रिम आदेशों तक बंद करा दिए गए हैं। इसके पीछे खाद की कमी बताई जा रही है।

रबी की फसल गेहूं, चना, मटर, सरसों, मसूर, अलसी की बोआई में डीएपी की जरूरत होती है। जिले में इस वर्ष यूरिया 20513 मीट्रिक टन,डीएपी 10797 मीट्रिक टन व एनके 805 मीट्रिक टन है। विभाग का दावा है कि इस लक्ष्य के सापेक्ष जिले की समितियों से यूरिया 2981, डीएपी 8121 व एनपीके 946 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। जबकि, बोआई के समय डीएपी खाद के लिए किसानों में मारामारी मचती है। डीएपी की मांग अब भी जारी है।

हालांकि विभाग का कहना है कि बिक्री केंद्रों में यूरिया 817 मीट्रिक टन, डीएपी 641 मीट्रिक टन व एनपीके 71 मीट्रिक टन उपलब्ध है। इसी तरह से गोदाम में यूरिया 1004 मीट्रिक टन, डीएपी 121 मीट्रिक टन व एनपीके का स्टॉक खत्म हो चुका है। बिक्री केंद्रों में खाद उपलब्धता का दावा करने के बावजूद शहर के तिंदवारी रोड स्थित मंडी समिति में खुले चार केंद्र पीसीएफ,केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी भंडार,डीसीडीएफ प्रथम व डीसीडीएफ द्वितीय के केंद्र 17 नवंबर के बाद अग्रिम आदेशों तक बंद करा दिए गए हैं।प्रतिदिन किसान आते हैं और निराश लौट जाते हैं।











