कुमार गौरव
बांदा। जिले में गौशालाओं में गौ संरक्षण क़ी व्यवस्थायें रेत के महल क़ी तरह ढेर हैं ?विशेष सचिव दुग्ध विकास एवं नोडल अधिकारी राम सहाय यादव की अध्यक्षता में गौसंरक्षण एवं संचालन प्रबंधन से संबंधित समीक्षा बैठक में यह हकीकत उजागर हुई। बैठक का पूरा समय सिर्फ निर्देशों पर हीं अटक कर रह गया।

बैठक में उपस्थित पशु चिकित्सा धिकारियों एवं जिला पंचायतराज एवं मुख्य विकास अधिकारी सिर्फ आंकड़ों के बुक के पन्ने पलटते ही रह गये। सचिव राम सहाय नें संकेतों में यह पूछा क़ी ” भैंस के आगे बिन बजाये भैंस बैठ पगुराये जैसी आप लोगों क़ी हालत क्यों है ?कहा कि सभी गोवंश गौशाला में संरक्षण बेहतर तरीके से किया जाए lउन्होंने पशु चिकित्सा अधिकारियों को गोवंसों का बेहतर रूप से चिकित्सीय उपचार तथा टीकाकरण करने के निर्देश दिएl

सचिव नें गौशाला में पेयजल की उपलब्धता तथा चराई की छाया व्यवस्था के बारे में भी मिली शिकायतों का जिक्र किया। नाराजगी जताई क़ी स्थितियां नाजुक हैं। गौवंश सड़कों पर विचरण कर रहे हैं! जिन गौशाला में बाउंड्री वॉल नहीं है वहां तार लगाकर बाउंड्री बाल बनाने को कहा। उन्होंने गौशाला में लाइट व्यवस्था अथवा सोलर पैनल लगानें के निर्देश दिए। ठंड से बचाव हेतु तिरपाल एवंअलाव का ज्ञान दिया। कहा टीकाकरण नियमित हो।
सचिव नें सभी गौशालाओं में अभिलेख रजिस्टर एवं केयर टेकर को अनिवार्य किया। गोबर से गैस गोबर प्लांट क़ी जरूरत पर बल दिया। उन्होंने सभी गोवंशों की ईयर टैगिंग एवं लाक बुक बनाए जाने के कड़े निर्देश दिए। सचिव राम सहाय नें हरा चारा हेतु चरागाह चिह्नित होंने क़ी हकीकत परखी, जो शून्य मिली। उन्होंने दुग्ध उत्पादन व पशुधन को बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री गो संवर्धन योजना में कार्य करने, दुग्ध कलेक्शन बढ़ाए जाने तथा दुग्ध समितियां नई का गठन करने के निर्देश दिये। उन्होंने पशुपालन के अंतर्गत पशुधन कुक्कुट एवं मत्स्य पालन पर भी जोर दिया।











