कुमार गौरव
बांदा। सीएम योगी आप बाखबर” हो जायें ! जिले में मध्य प्रदेश यूपी के रास्ते “ओवर लोड परिवहन का डंका बजा रहें ” है। इसमें “भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा फंडा” है। आपको बता दें की मध्य प्रदेश इन दिनों बालू खनन एवं परिवहन में यूपी प्रशासन के छक्के छुड़ा रहा है। इसमें यूपी के बांदा जिले के जयचंदों की भी सहभागिता है। इसमें “कुछ कथित तौर पर अपने को दिग्गज मानने वाले मीडिया टुकडा खोर मीडिया कर्मी, प्रशासनिक एवं विभागीय जिम्मेदारों की भी शह” है। इन सबको कथित प्रभावशाली बालू माफिया अनिल बंसल अपने प्रभाव में नचा रहा हैं औऱ गीत सा गा रहा हैं नाचो मेरी बुलबुलों तुम्हें पैसा मिलेगा मेरे जैसा कद्रदान कहां मिलेगा?

दूसरी ओर गाहे -बगाहे ओवर लोड खनिज परिवहन की धर -पकड़ की मिली भगत रणनीति तो कभी औचक निरीक्षण को भी सहृदयता से अंजाम दिया जाता है। वैसे “फंडा यह है कि सोची -समझी दस्तूर के तहत खनिज, परिवहन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ओवरलोडिंग के खिलाफ जांच अभियान चलातें हैं। फिर इस खेल के पतंग में ढील दे दी जाती” है। उधर, “धरपकड़ अभियान की कथित इस नौटंकी” में ओवरलोड ट्रक रात में गांव की गलियों में छिप जातें हैं। टीम के जाने के बाद “सैकड़ों ट्रक बैरियर से बाइज्ज्त” निकाल दिये जाते हैं!

वैसे आपको बता दें कि संयुक्त चेकिंग को लेकर ओवरलोड ट्रक व डंपर चालकों में तय शुदा रिहर्सल की तरह हलचल मच जाती है। रात के अंधेरे में गांव की गलियों और जंगल में पेड़ों की आड़ में ट्रक-डंपर छिप जातें हैं ,मानों “भूसे के ढ़ेर में सुई छिप गई” हो। इसमें “लोकेशन बाजों” की “महत्व पूर्ण भूमिका” होती है। “दलाली की रकम की जेबों में हनक” हो जाती है। टीम अधिकारियों की पल-पल की खबर ट्रक चालकों और मालिकों तक पहुंचाते हैं। एवज में प्रति ट्रक “मोटे रुपये भेंट में” मिलते हैं। दूसरी तरफ सुबह से ही ट्रक-डंपर चालकों में “शहर से बाहर निकलने की होड़” रोजाना मची रहती है।













