कुमार गौरव
बांदा। जिले में “भूमाफिया राजस्व” की मिलीभगत से पत्रकार की जमीन हड़पने की कोशिश का मामला सामने आया है। भारतीय सहारा के जिला संवाददाता विनोद कुमार मिश्रा की कनवारा बांगर स्थित कृषि भूमि गाटा 1910 को चकमार्ग के नाम पर काटने की साजिश रची जा रही है। जमीन का सच यह है कि पत्रकार के खेत के पश्चिम में पहले से 2 गाटा का पक्का चकमार्ग मौजूद है। बावजूद इसके प्लाटिंग माफिया के दबाव में लेखपाल रमेश यादव के साथ गई राजस्व टीम ने पत्रकार के खेत के अंदर 5 से 6 फुट तक नाप करके लकीर खींच दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि टीम ने आते ही घेराबंदी देखकर आनन-फानन में नाप की और वापस लौट गई।

सवाल यह है की जब इसी चकमार्ग की पूर्व के वर्षों में 6-7 बार नाप और हदबंदी भी हो चुकी है तो फिर नई नाप की जरूरत क्यों पड़ी? रिकॉर्ड बताता है कि त्कालीन लेखपाल दीपक त्रिपाठी और कानूनगो अवधेश पटेल द्वारा नापें हुई। नायब तहसीलदार के नेतृत्व में भी राजस्व टीम नें नाप की। लेखपाल नें मौके पर पत्थर गड़ी कराई थी। उसी पत्थर गड़ी के आधार पर पत्रकार ने 3 महीने पहले लाखों रुपये खर्च कर लोहे के एंगल और जाली से पूरे खेत की घेराबंदी कराई। अब उसी को एसडीएम को गलत रिपोर्ट देकर जेसीबी से तोड़कर जमीन निगलने की तैयारी है! सूत्रों के अनुसार जिस प्लाटिंग को चकमार्ग चाहिए,उसमें एक राजस्व विभाग का ही कर्मी पार्टनर है। आरोप है कि उसी के इशारे पर 2 गाटा के फुट के चकमार्ग को कागजों में 18 फुट दिखाकर पत्रकार की जमीन में घुसाया जा रहा है।

पीड़ित पत्रकार विनोद मिश्रा ने एसडीएम सदर को पत्र देकर मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच त्कालीन लेखपाल दीपक त्रिपाठी और कानूनगो अवधेश पटेल की मौजूदगी में कराई जाए और पुरानी पत्थर गड़ी के आधार पर ही नाप हो। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दबंगों के दबाव में उनकी जमीन छीनी गई तो वह मजबूरी में कलम के साथ सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।










