विनोद मिश्रा
बांदा। सियासत इसे ही कहते हैं सुबह साइकिल,शाम को हाथ। समाजवादी पार्टी के लिए जीने-मरने की कसमें खाने वाले लल्ले गुरु उर्फ पूर्व पालिका अध्यक्ष मोहन साहू ने आखिरकार अपना पुराना नारा ही बदल लिया। साइकिल को लात मारकर उन्होंने गांधी टोपी पहन ली और लखनऊ जाकर कांग्रेस का पंजा थाम लिया।

मंगलवार को कांग्रेस कार्यालय में सदस्यता लेते ही मोहन साहू का सियासी अवतार बदल गया। कल तक जो जुबान अखिलेश यादव जिंदाबाद बोलती थी, अब वही जुबान राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाएगी। यह दलबदल अचानक नहीं हुआ। पिछले महीने हमने चर्चाओं और सूत्रों के आधार पर खबर प्रकाशित की थी कि मोहन साहू बसपा का दामन थाम सकते हैं। उनकी बसपा में जाने की पूरी तैयारी थी,लेकिन कथित तौर पर अंदरखाने लेनदेन की बात नहीं बन पाई,जिसके कारण हाथी वाला दरवाजा बंद हो गया? फिर क्या था, लल्ले गुरु ने तुरंत कांग्रेस वाला गेट खोल लिया और हाथ का पंजा थाम लिया।

इस पूरी कवायद के पीछे एक ही मिशन है सदर विधानसभा। सपा में मोहन साहू की हालत अपनी कथित करनी से हाशिए पर हो गई थी। वहां डांट फटकार मिल रही थी! पार्टी में न पूछ,न टिकट की कोई उम्मीद,जबकि वह हर हाल में सदर से चुनाव मैदान में उतरनें का सपना पाले हैं। मोहन साहू के कांग्रेस में शामिल होने को इसी सियासी नजरिए से देखा जा रहा है कि वहां से टिकट का रास्ता आसान होगा! पर “सपने सुहाने होंगे या धड़ाम” यह वक्त बतायेगा।










