विनोद मिश्रा
चित्रकूट। रामनगरी चित्रकूट 90 साल की सबसे बड़ी जल प्रलय में डूब गई, 400 से ज्यादा दुकानें तबाह हो गईं, हजारों बीघा फसल सड़ गई, रामघाट जल समाधि ले चुका है… लेकिन सत्ता का दिल नहीं पसीजा। अब इस अनदेखी पर भाजपा के अंदर ही नाराजगी फूट पड़ी है। भाजपा के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय संयोजक (आपदा राहत विभाग) पं. जगदीश प्रसाद गौतम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तीखा पत्र लिखकर सरकार को आईना दिखाया है।

पत्र की भाषा साफ कह रही है – जिला प्रशासन के भरोसे कुछ नहीं हो रहा। गौतम ने लिखा है कि अतिवृष्टि और बाढ़ से रामघाट, तरौंहा, डिलौरा, गोबरिया, अमानपुर, कपसेही, केवटरा, मलकाना, टिकुरा, बंधुईन, मकरी, भभौरा, चौरा, कलवारा, बरेठी, खोरिया, भानपुर, लोहदा, पनौटी, राजापुर तक के गांव बर्बाद हो गए हैं, घर-दुकान के ऊपर तक पानी चला गया, हजारों बीघा सब्जी-फसल नष्ट हो गई, पर आज तक न व्यापक सर्वे हुआ,न मुआवजा।

इस संदर्भ में विचारणीय यह है की जब भाजपा का अपना आपदा प्रबंधन का पदाधिकारी ही सीएम को चिट्ठी लिखकर “तत्काल निष्पक्ष सर्वे और वास्तविक क्षति के आधार पर मुआवजा” मांग रहा है,तो आम आदमी की कौन सुनेगा? चित्रकूट में चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री का चित्रकूट दौरा पिछले दिनों स्थगित हो गया। प्रभारी मंत्री नंदी आये औऱ कुछ घंटे बाद राजधानी कूच कर गये। हवाई सर्वे तक नहीं हुआ! इसी खामोशी ने भाजपा कार्यकर्ताओं में रोष भर दिया है। गौतम की चिट्ठी सिर्फ पत्र नहीं, चित्रकूट की उपेक्षा पर पार्टी के भीतर पनप रहे आक्रोश का पहला धमाका है?










