March 3, 2026 7:08 pm

चित्रकूट का राष्ट्रीय 53 वां रामायण मेला, गौरवशाली है इसका इतिहास

चित्रकूट का राष्ट्रीय 53 वां रामायण मेला : गौरवशाली है इसका इतिहास
  • कुमार गौरव

चित्रकूट। जिले में आयोजित होने वाला 53 वां पांच दिवसीय राष्ट्रीय रामायण मेले की शुरुवात इस बार 15 फरवरी शिवरात्रि से होगी। इस मेले के इतिहास के झरोखों में जायें तो इसकी परिकल्पना समाजवादी चिंतक डॉ राम मनोहर लोहिया ने की थी। 1973 में शुरू हुए इस राष्ट्रीय रामायण मेले में अब तक देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई और अटल बिहारी बाजपेयी समेत दर्जनों केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल शिरकत कर जहां आयोजन की शोभा बढ़ाते रहे हैं। वहीं देश-विदेश से आने वाले विद्वान ने ज्ञान का प्रकाश और कलाकारों ने अपनी कला का जलवा बिखर कर समारोह को ऐतिहासिक और यादगार बनाया है।

चित्रकूट का राष्ट्रीय 53 वां रामायण मेला : गौरवशाली है इसका इतिहास
वर्ष 1960 में समाजवादी चिंतक डॉ राममनोहर लोहिया ने धर्म नगरी चित्रकूट में राष्ट्रीय रामायण मेले के आयोजन की परिकल्पना की थी, जिसे 1973 में मानस की रचना के 400 वर्ष पूरे होने पर ’मानस चतुर्थशती समारोह’ के रूप में साकार रूप दिया गया था। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के संरक्षकत्व में आयोजित इस प्रथम राष्ट्रीय रामायण मेले भव्य स्वरूप देने में आयोजन समिति के अध्यक्ष जर्नादन दत्त शुक्ल (आईपीएस),कार्यकारी अध्यक्ष गोपाल करवरिया,मंत्री आचार्य बाबूलाल गर्ग का अहम योगदान था।

चित्रकूट का राष्ट्रीय 53 वां रामायण मेला : गौरवशाली है इसका इतिहासइसके बाद से लगातार यह रामायण मेला भव्य स्वरूप लेता गया। वर्ष 1978 में आयोजित हुए पंचम राष्ट्रीय रामायण मेले का उद्घाटन स्वयं देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने किया। वहीं इस राष्ट्रीय मेले की अध्यक्षता प्रख्यात कवित्री महादेवी वर्मा ने की थी।

चित्रकूट का राष्ट्रीय 53 वां रामायण मेला : गौरवशाली है इसका इतिहासइसके अलावा तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री राजनारायण आयोजन समिति के संरक्षक एवं स्वागताध्यक्ष के रूप में शिरकत कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान किये थे। इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय रामायण मेले में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर,मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार जहां मंच की शोभा बढ़ा रहे थे। वहीं उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे चुके डॉ विष्णुकांत शास्त्री बतौर विद्वान उपस्थित रहे।बतौर राज्यपाल भी श्री शास्त्री नें इस मेले का उद्घाटन किया। इसके अलावा राष्ट्रीय रामायण मेले के 6 वें महोत्सव का उदघाटन देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा किया गया था।1991 में आयोजित राष्ट्रीय रामायण मेले का उद्घाटन देश के तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह द्वारा किया गया था।

चित्रकूट का राष्ट्रीय 53 वां रामायण मेला : गौरवशाली है इसका इतिहास

इसके बाद से अब तक लगातार इस राष्ट्रीय रामायण मेले के उदघाटन और समापन में केंद्रीय मंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्यपाल आदि की सहभागिता बनी रहीं। रामायण मेले के कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया और मंत्री करुणा शंकर द्विवेदी का कहना है कि रामायण मेले को प्रदेश सरकार प्रांतीय मेले की मान्यता दे चुकी है लेकिन इसका वर्तमान स्वरूप राष्ट्रीय है जिसे मेला समिति अंतर्राष्टीय स्वरूप देने के लिये निरंतर प्रयास कर रही है।

Leave a Comment

और पढ़ें

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें