March 3, 2026 8:15 pm

राष्ट्रीय रामायण मेले में संतों की वाणी से गूंजा परिसर: आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का संगम

राष्ट्रीय रामायण मेले में संतों की वाणी से गूंजा परिसर: आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का संगम
  • कुमार गौरव

चित्रकूट। चित्रकूट में आयोजित राष्ट्रीय रामायण मेला के दूसरे दिन आध्यात्मिक ऊर्जा अपने चरम पर दिखाई दी। भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मेला परिसर में उमड़ने लगी और “राम नाम” के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। देश के विभिन्न प्रांतों से पधारे संतों और विद्वानों ने रामकथा के आध्यात्मिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक आयामों पर प्रकाश डाला।

राष्ट्रीय रामायण मेले में संतों की वाणी से गूंजा परिसर: आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का संगमप्रख्यात वक्ता सीताराम शरण रामयानी ने संत संगति की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उत्थान संतों के सान्निध्य से ही संभव है। उन्होंने कहा कि संतसंग ईश्वर की विशेष कृपा से ही प्राप्त होता है और यही जीवन को दिशा देता है। आचार्य रामलाल द्विवेदी ‘प्राणेश’ ने रामचरितमानस को मानव जीवन का आदर्श ग्रंथ बताते हुए कहा कि इसमें वर्णित मर्यादाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि राम नाम व्यक्ति को आंतरिक शक्ति और संतुलन प्रदान करता है।राष्ट्रीय रामायण मेले में संतों की वाणी से गूंजा परिसर: आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का संगम
डॉ. हरि प्रसाद दुबे ने अपने विचारों में बताया कि रामकथा केवल एक धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि विभिन्न परंपराओं और साहित्य में भी इसकी गूंज सुनाई देती है। उन्होंने प्राचीन बौद्ध साहित्य में सुरक्षित रामकथा संबंधी जातकों का उल्लेख करते हुए इसकी वैश्विकता को रेखांकित किया। डॉ. कृष्णमणि चतुर्वेदी ‘मैत्रेय’ ने हनुमान चालीसा के पाठभेद पर चर्चा करते हुए शुद्ध पाठ की आवश्यकता पर बल दिया और ‘शंकर सुवन केसरी नंदन’ को प्रमाणिक पाठ बताया।राष्ट्रीय रामायण मेले में संतों की वाणी से गूंजा परिसर: आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का संगमलक्ष्मी प्रसाद शर्मा ने रामकथा प्रवचन में मानस की चौपाइयों के माध्यम से मोह और अहंकार को जीवन के दुखों का मूल बताया। वहीं रामप्रताप शुक्ल ‘मानस किंकर’ ने संत समाज को जीवंत तीर्थ की संज्ञा देते हुए कहा कि संतों की वाणी ही समाज का नैतिक पथ प्रदर्शक है।

राष्ट्रीय रामायण मेले में संतों की वाणी से गूंजा परिसर: आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का संगम
सांस्कृतिक मंच पर भी भक्ति और लोक परंपरा का सुंदर समागम देखने को मिला। शरद अनुरागी के आल्हा गायन ने वीर रस का संचार किया, श्रद्धा निगम के नृत्य कला गृह के कलाकारों ने भावपूर्ण प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। संजोली पांडेय के लोकगीतों ने वातावरण में लोकसंगीत की मधुरता घोल दी। पूरा परिसर रामनाम की गूंज से आलोकित रहा और श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। इस अवसर पर राष्ट्रीय रामायण मेला के कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया, महामंत्री डॉ. करूणा शंकर द्विवेदी, प्रचार मंत्री राजाबाबू पांडेय सहित अनेक गणमान्य अतिथि और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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