March 3, 2026 6:50 pm

डा. हृदयेश पटेल द्वारा जिला अस्पताल में इलाज या आर्थिक शोषण ? मरीजों ने उठाए गंभीर सवाल !

डा. हृदयेश पटेल द्वारा जिला अस्पताल में इलाज या आर्थिक शोषण ? मरीजों ने उठाए गंभीर सवाल !

कुमार गौरव

बांदा। जिला अस्पताल, जो कभी “मरीजों के लिए इलाज” और “आश्वासन का केंद्र” था, अब “आर्थिक शोषण और भ्रष्टाचार” का ‘गढ़’ बन चुका है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में “स्वास्थ्य व्यवस्था” का “माफिया शासन” चल रहा है और इस “खेल के केंद्र” में हैं “फिजिशियन डॉक्टर हृदयेश पटेल”, जिन पर आरोप हैं कि वे सरकारी “अस्पताल को अपने निजी लाभ” के लिए “इस्तेमाल” कर रहे हैं। मरीजों के आरोप हैं कि फिजिशियन डाक्टर हृदयेश पटेल “ग्रीनिज बुक” का मानों अपना “निजी रिकार्ड” बना रहे हैं, जिससे मरीजों को दवा और जांच के लिए मजबूर किया जा रहा है और वे आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं।

डा. हृदयेश पटेल द्वारा जिला अस्पताल में इलाज या आर्थिक शोषण ? मरीजों ने उठाए गंभीर सवाल !
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के आरोप हैं कि डाक्टर हृदयेश पटेल सरकारी नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए अपने निजी फायदे के लिए मरीजों को निशाना बना रहे हैं। अस्पताल में मरीजों को मजबूर किया जाता है कि वे केवल उन्हीं मेडिकल स्टोर और पैथालॉजी सेंटर से दवा और जांच कराएं, जिनसे डाक्टर कथित कमीशन लेते हैं। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि डाक्टर हृदयेश पटेल मरीजों को बाहर से दवा लिखते हैं और इसे उसी मेडिकल स्टोर से खरीदना अनिवार्य कर देते हैं। यदि मरीज किसी अन्य स्टोर से दवा लाते हैं तो उन्हें नकली बताकर अपमानित किया जाता है। इसके चलते मरीज मानसिक और आर्थिक दोनों तरह के दबाव में हैं। “हम अस्पताल आते हैं इलाज के लिए, लेकिन डाक्टर हमें पैसों के लिए बाहर भटका रहे हैं। दवा और जांच खरीदने के लिए हमें वहां से मजबूर किया जाता है। यह पूरी तरह उत्पीड़न है,” एक पीड़ित मरीज ने आक्रोश जताया।

डा. हृदयेश पटेल द्वारा जिला अस्पताल में इलाज या आर्थिक शोषण ? मरीजों ने उठाए गंभीर सवाल !सूत्रों का दावा है कि डाक्टर हृदयेश पटेल सरकारी अस्पताल में रहते हुए निजी प्रैक्टिस भी संचालित करते हैं। पैथालॉजी सेंटर और मेडिकल स्टोर से प्रति जांच और दवा पर कमीशन लेने की बातें उजागर हुई हैं। इससे साफ हो गया है कि मरीजों की परेशानी और अस्पताल में भ्रष्टाचार का खेल दोनों एक साथ चल रहा है। “डाक्टर अपने निजी फायदे के लिए सरकारी नियमों को ताक पर रख रहे हैं। मरीजों की जान और उनकी जेब दोनों खतरे में हैं,” एक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने बताया। स्थानीय नागरिकों और मरीजों ने प्रशासन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो यह भ्रष्टाचार और शोषण बढ़ेगा और अस्पताल की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। बांदा जिला अस्पताल में मरीजों के आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरी को उजागर कर दिया है। डाक्टर हृदयेश पटेल पर लगे आरोप न केवल मरीजों के लिए खतरा हैं, बल्कि पूरे अस्पताल की विश्वसनीयता को चुनौती दे रहे हैं। प्रश्न यह है कि प्रशासन कब तक इस खुली लूट और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करेगा?

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