March 3, 2026 8:13 pm

चित्रकूट में राष्ट्रीय रामायण मेले का तृतीय दिवस: संतों के प्रवचनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

चित्रकूट में राष्ट्रीय रामायण मेले का तृतीय दिवस: संतों के प्रवचनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

कुमार गौरव

चित्रकूट। धर्मनगरी चित्रकूट में चल रहे राष्ट्रीय रामायण मेले का तृतीय दिवस आस्था, अध्यात्म और सांस्कृतिक वैभव की अनूठी छटा लेकर आया। सुबह से ही मेला परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और देर रात तक भक्ति रस की धारा प्रवाहित होती रही।

चित्रकूट में राष्ट्रीय रामायण मेले का तृतीय दिवस: संतों के प्रवचनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
देश के विभिन्न भागों से आए संतों, विद्वानों और रामकथा मर्मज्ञों ने रामायण के विविध प्रसंगों की व्याख्या कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य अधोक्षजानंद महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान राम का जीवन त्याग, मर्यादा और करुणा का प्रतीक है, और इन्हीं आदर्शों को अपनाकर समाज में समरसता स्थापित की जा सकती है।

चित्रकूट में राष्ट्रीय रामायण मेले का तृतीय दिवस: संतों के प्रवचनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
पूर्व सांसद उदयभान करवरिया ने चित्रकूट की पावनता और राम वनवास से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। पंडित सनत कुमार मिश्र ने राम की सर्वव्यापकता का उल्लेख करते हुए प्रेम और भक्ति को ईश्वर प्राप्ति का सच्चा मार्ग बताया।

चित्रकूट में राष्ट्रीय रामायण मेले का तृतीय दिवस: संतों के प्रवचनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
विद्वानों की श्रृंखला में पंडित लक्ष्मी प्रसाद शर्मा ने रामचरितमानस में नारी पात्रों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला और बताया कि सीता, शबरी जैसी विभूतियों ने त्याग और समर्पण की मिसाल पेश की। बांदा से आए रामप्रताप शुक्ल ने हनुमान जी के साहस और समर्पण का ओजपूर्ण वर्णन किया। डॉ. रामलाल द्विवेदी ने तुलसीदास के काव्य को जीवन में मानसिक शांति और नैतिक मूल्यों का मार्गदर्शक बताया, जबकि मुजफ्फरपुर के डॉ. संजय पंकज ने रामायण को भारतीय संस्कृति का आधार स्तंभ कहा।

चित्रकूट में राष्ट्रीय रामायण मेले का तृतीय दिवस: संतों के प्रवचनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
सांस्कृतिक संध्या में भजन, शास्त्रीय नृत्य, रामलीला, रासलीला और कठपुतली नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों ने वातावरण को राममय कर दिया। प्रयागराज की सुश्री संगीता राय और वाराणसी की अंतरराष्ट्रीय भजन गायिका ने भक्ति गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आकाशवाणी प्रयागराज के विशेष कार्यक्रम “रामेति इति रामः” के अंतर्गत प्रस्तुत भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति के भाव में डुबो दिया। मेले का समापन “सीता स्वयंवर” की आकर्षक नाट्य प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसमें कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, मेला समिति के पदाधिकारियों और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। राष्ट्रीय रामायण मेला न केवल आस्था का उत्सव बनकर उभरा, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण का सशक्त मंच भी सिद्ध हो रहा है।

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