कुमार गौरव
बांदा। बुंदेलखंड क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसान यूनियन महाशक्ति के राष्ट्रीय महासचिव बबलू सिंह ने अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से प्रोत्साहित जैविक खेती के लक्ष्य को पूरा करने के लिए वे सीधे तौर पर किसानों से संपर्क साध रहे हैं। उन्हें इस स्वस्थ एवं स्थायी खेती पद्धति के फायदे बता रहे हैं।

किसान नेता बबलू सिंह का कहना है कि जैविक खेती केवल किसानों के लिए ही नहीं,बल्कि पूरे पर्यावरण और समाज के लिए एक स्वर्णिम अवसर है। “किसान जैविक खेती अपनाकर न केवल मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनाए रख सकते हैं, बल्कि लंबे समय तक स्थिर और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इससे प्रदूषण कम होगा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी संभव होगा।” उन्होंने जोर देकर कहा। एक विशेष भेंट कार्यक्रम में बबलू सिंह ने जैविक खेती के प्रमुख तरीके और लाभों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों की जगह गोबर की खाद, कंपोस्ट और विशेष रूप से वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग करने से मिट्टी न केवल उपजाऊ बनी रहती है, बल्कि इसकी संरचना में सुधार भी आता है। उन्होंने कहा, “केंचुआ खाद (वर्मीकम्पोस्ट) लगातार उपयोग करने से मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है और पानी धारण करने की क्षमता भी बेहतर होती है।”

किसान नेता बबलू सिंह ने किसानों से अपील किया कि वे अपने खेतों की अपशिष्ट सामग्री जैसे पराली, सूखी पत्तियां और फसल अवशेषों का उपयोग करके स्वयं ही खाद तैयार करें। “इससे न केवल बाहरी खर्चे कम होंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया जा सकेगा। साथ ही, आग में पराली जलाने से भी बचा जा सकता है, जो वायु प्रदूषण का बड़ा कारण है।” बबलू सिंह ने जैविक खेती के मुख्य लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे उत्पादन लागत कम होती है, फसलें अधिक टिकाऊ होती हैं। स्वास्थ्य के लिए भी जैविक उत्पाद अधिक सुरक्षित होते हैं।











