March 10, 2026 11:53 am

बांदा में ट्रेनों की खराब स्थिति से भक्त परेशान: यात्रियों की स्थिति दयनीय!

कुमार गौरव

बांदा। जिले के यात्री और धार्मिक श्रद्धालु सार्वजनिक परिवहन की खराब स्थिति से बेहद परेशान हैं। जिले से गुजरने वाली कानपुर से खजुराहो तक जाने वाली मेमू ट्रेन के आठ डिब्बों की सीमित क्षमता ने यात्रियों की मानसिक पीड़ा और बढ़ा दी है। विशेष रूप से शुक्रवार और सोमवार को बागेश्वर बालाजी सरकार जाने वाले भक्तों को ट्रेन में जगह न मिलने के कारण लंबी भीड़ का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि इस मेमू ट्रेन की वर्तमान स्थिति उनकी आस्था और श्रद्धा के प्रति उपेक्षा जैसी है। “हजारों की संख्या में भक्त बालाजी सरकार की यात्रा करते हैं, लेकिन ट्रेन में सिर्फ 8 डिब्बे हैं। इसके बावजूद यह यात्रियों की भीड़ को समायोजित नहीं कर पा रही। लोगों को खड़े-खड़े यात्रा करनी पड़ रही है, कई बार तो ट्रेन में चढ़ पाना भी मुश्किल हो जाता है,”। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि उत्तर मध्य रेलवे के मंडल प्रबंधक आस्था और धार्मिक भावनाओं के सम्मान में कानपुर पैसेंजर ट्रेन (जो अब खजुराहो तक जाती है) में कम से कम चार अतिरिक्त बोगियों का समावेश किया जाए। इससे ही यात्रियों को सुखद और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिल सकेगा।

बांदा से जुड़ी एक और बड़ी समस्या बुंदेलखंड एक्सप्रेस की है। नाम में “एक्सप्रेस” होने के बावजूद यह ट्रेन अपनी गति में मेमू ट्रेन से भी पिछड़ चुकी है। यात्री आरोप लगा रहे हैं कि यह ट्रेन लगभग सभी छोटे-छोटे स्टेशनों पर रुकती है, जिससे यात्रा का समय बहुत अधिक लगता है। फिर भी यात्रियों से एक्सप्रेस ट्रेन का किराया वसूला जा रहा है। आम जनता की मांग है कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस के लिए मार्जिन टाइम में सुधार किया जाए और इसकी गति बढ़ाई जाए। साथ ही कुछ अनावश्यक स्टॉपेज हटाए जाएं, ताकि यात्रियों को एक्सप्रेस ट्रेन का सही मायने में लाभ मिल सके।

प्रयागराज से ग्वालियर तक जाने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस का विस्तार झांसी से आगे ग्वालियर तक कर दिया गया है, जो एक सकारात्मक कदम है। लेकिन यह ट्रेन अभी भी उन्हीं सभी छोटे स्टेशनों पर रुक रही है जहां पहले पैसेंजर ट्रेन रुकती थी। यात्रियों का कहना है कि अब जब इसे “एक्सप्रेस” घोषित किया गया है और यात्रियों से एक्सप्रेस किराया लिया जा रहा है, तो इसकी गति और स्टॉपेज में समायोजन किया जाना चाहिए। “मेमू और पैसेंजर ट्रेनें छोटे स्टेशनों के लिए पर्याप्त हैं। एक्सप्रेस ट्रेनों को बड़े शहरों और महत्वपूर्ण हब के बीच तेज गति से चलना चाहिए। नाम बदल देने से ही ट्रेन एक्सप्रेस नहीं बन जाती। स्थानीय निवासियों का मानना है कि उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन को बांदा क्षेत्र के विकास और यात्रियों की आवाज को गंभीरता से लेना चाहिए। धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप ट्रेन सेवाओं में सुधार होना जरूरी है।

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